लोकतंत्र को सदैव रखें सिंचिंत ताकि हमारा लोकतंत्र रह सके आबाद: प्रो. मुनेश्वर यादव।

लोकतंत्र को सदैव रखें सिंचिंत ताकि हमारा लोकतंत्र रह सके आबाद: प्रो. मुनेश्वर यादव।

लनामिविवि : राजनीति विज्ञान विभाग में “अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस:- सशक्त अगली पीढ़ी” पर एक व्याख्यान का आयोजन विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव की अध्यक्षता में किया गया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने कहा कि आदिकाल से दुनिया चली आ रही है। हर युग में शासन का अपना एक अलग-अलग रूप रहा है। बदलते समय के साथ शासन तंत्र में बदलाव की जरूरत होती है। सभी प्राणियों में मानव को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसीलिए मानव सदैव से सभ्यता और संस्कृति के साथ जीना पसंद करता आ रहा है। जब आप आदिकाल, प्राचीन काल व मध्यकालीन काल का अध्ययन करेंगे तो पता चलेगा कि शासन तंत्र राजाओं के हाथों में होता था और राजा का बेटा ही राजा बनता था। अगर संयोग से किसी मंदबुद्धि के हाथों में राज्य का बागडोर चला जाता था तो उस राज्य के नागरिकों का दिन दुर्दिन हो जाता था और किसी तानाशाह के हाथों में चला जाता था तो उस राज्य के नागरिक सदैव शोषित, पीड़ित व वंचित ही रहते थे। ये मानव सभ्यता के त्रासदी का सबसे बड़ा दौर था। समय के साथ मांग हुई, आंदोलन हुई और बदलाव हुई। जिसके बाद दुनिया के देशों ने लोकतंत्र को चुना। आज लोकतंत्र शासन का सबसे बेहतर रूप है, जिसमें सबों को समानता का अधिकार है। इसीलिए लोकतंत्र की स्थापना में वोट का भी अहम स्थान है। आपके वोट से ही लोकतंत्र की स्थापना होती है। इसीलिए अपने वोटों के कीमतों को भी समझें और अपने लोकतंत्र को सदैव सिंचिंत करके रखें ताकि हमारा लोकतंत्र आबाद रह सके और हमें हमारा सारा अधिकार बिना किसी भय मुक्त व दवाब के मिल सके। इसीलिए इस साल अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के अवसर पर सभी छात्र-छात्रा, शोधार्थी व शिक्षक शपथ लें कि लोकतंत्र में अपनी महत्ती भूमिका को समझेंगे व इसे बखूबी निभाएंगे।

मिथिला विश्वविद्यालय के उप-परीक्षा नियंत्रक (व्यवासायिक व तकनीकी शिक्षा) सह विभाग के युवा शिक्षक डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिये व बनाये रखने के उद्देश्य से वर्ष 2007 से हर साल 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाने का निर्णय लिया। अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस, एक वैश्विक पालन है जो एक मौलिक मानव अधिकार, सुशासन और शांति की आधारशिला के रूप में लोकतंत्र के महत्व को रेखांकित करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा पारित एक प्रस्ताव द्वारा 2007 में स्थापित, यह दिन दुनिया भर के समाजों को आकार देने में लोकतंत्र की आवश्यक भूमिका की याद दिलाता है जो कि लोकतंत्र की स्थापना में अहम भूमिका निभाता है। 2023 में अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस का थीम “सशक्त अगली पीढ़ी” है। यह विषय उस महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है जो युवा लोग लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में निभाते हैं और उन निर्णयों में अपनी आवाज को शामिल करने के महत्व पर जोर देते हैं जो उनकी दुनिया को गहराई से प्रभावित करते हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में युवाओं की भागीदारी को पहचानना और पोषित करना लोकतंत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसीलिए हम सबों का भी एक नैतिक कर्तव्य बनता है कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिये अपनी भागीदारी निभाएं।

विभाग के वरीय शिक्षक प्रो. मुकुल बिहारी वर्मा ने कहा कि लोकतंत्र दुनिया की बेहतरीन शासन पद्धति का नाम है। अब्राहम लिंकन ने कहा था जनता का, जनता के लिये व जनता के द्वारा शासन ही लोकतंत्र है। आज लोकतंत्र का ही तकाजा है कि दुनिया में हर वर्ग के लोगों को अपना अधिकार मिल सका। समाज में समानता स्थापित हो सकी। आज समाज के अंतिम पंक्ति में हाशिये पर बैठे लोगों तक विकास की प्रकाश पहुंची, वो सशक्त हुए और अपने अधिकारों के लिये बोलना सीखा। संविधान ने उन्हें मूल अधिकार दिया। उसमें किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया गया, ये सब उसी लोकतंत्र की देन है। आज अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस है जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ मना रहा है। तो आईये हम सब संकल्प लेते हैं कि लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में सदैव अपनी अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

इस कार्यक्रम में दर्जनों छात्र-छात्रा व शोधार्थियों ने भी भाग लिया और अपने-अपने विचारों को रखा। मंच संचालन शिक्षक दिनेश कुमार ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन गंगेश कुमार झा ने किया।

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