दरभंगा।अहिंसक क्रान्ति भूदान आन्दोलन के प्रणेता तथा गांधी के द्वारा देश की स्वतन्त्रता के लिए चलाये गये व्यक्तिगत सत्याग्रह के प्रथम सत्याग्रही ,समाज सुधारक, प्रसिद्ध संत, चिन्तक, भारत रत्न,विचारक और आचार्य विनोबा भावे की जन्म दिवस जयंती ग्राम स्वराज्य अभियान समिति के तत्वावधान में समाहरणालय स्थित भूदान यज्ञ कमिटी कार्यालय में मनाई गई। इस अवसर पर जिला सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष हृदय नारायण चौधरी ने कहा कि उन्होने अपना सम्पूर्ण जीवन गांधी के एकादश व्रतो का पालन करते हुए गांधी के विचार और सिद्धांत को समर्पित कर दिया था l गांधी के निधन के बाद उन्होने अहिंसा का पालन करते हुये भूदान और अन्य अनेक रचनात्मक कार्यो से समाज को नई दिशा दी l वे गांधी जी के आश्रम के दुर्लभ रत्न थे l गांधी जी उनके सम्बन्ध मे स्वयं लिखा है कि विनोबा मुर्तिमान अहिंसा है l अधिवक्ता राम सुखित चौधरी ने कहा की संत विनोबा भावे जनता को स्वावलंबी बनाकर उसे अपनी शक्ति के प्रति जागृत करना चाहते थे। आर्थिक समानता की अवधारणा को विनोबा भावे अधिक महत्व दिया, वे मानते थे की आर्थिक समानता के बगैर अच्छे समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। बुनकर संघ के नेता मन्नान ने कहा की संत विनोबा भावे की भूदान आंदोलन ने अमीरी गरीबी के बीच के फासला को कम किया,आज भूदान कमिटी को भंग कर सरकार सही नही की है,भूदान के कार्य को आज आगे बढ़ाने की जरूरत है। ग्राम स्वराज्य अभियान समिति के संयोजक अजीत कुमार मिश्र ने विचार व्यक्त करते हुए कहा की संत विनोबा भावे खादी को सर्वोदय समाज और स्वराज्य शक्ति का सबसे असरकारक साधन मानते थे लोक कल्याण के लिए खादी ग्रामोद्योग को गांधी के दिखाए पथ को सबसे सुगम माना है, उनका मानना था ग्राम स्वराज्य गांव का जन्म सिद्ध अधिकार है और ग्राम स्वराज्य का अधिकार मिले भारत का स्वराज्य अधूरा है, आगे उन्होंने संत विनोबा को मानवता के आराधक भारतीयता के संरक्षक सामाजिक अध्यात्म के जनक बताते हुए कहा कि आज की परिस्थिति मे विनोबा के विचारों को नईं पीढी के बीच ले जाने पर बल देते हुए उनके जीवन को चिंतन पर्व के रुप में आत्मसात करने की जरूरत बताए। उक्त अवसर पर जिला भूदान कमिटी के कार्यालय मंत्री रविन्द्र कुमार सिन्हा, पूर्व मंत्री बिपिन वर्मा,राम चंद्र सहनी , मृत्युंजय प्रसाद,उपेंद्र पासवान मनोरंजन वर्मा दीपक कुमार ,राकेश झा राम लोभित चौधरी शिवशंकर ठाकुर, कृष्ण कुमार सिंह ललित कुमार झा बसंत शाह योगेन्द्र यादव अरुण दास भी विचार व्यक्त किए।
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