महारानी कल्याणी महाविद्यालय में स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह कार्यक्रम का आज हुआ समापन।

दरभंगा । स्थानीय महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय, दरभंगा में मिथिला विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित विविध कार्यक्रमों का आज समापन समारोह आयोजित किया गया।
समापन समारोह में बतौर अध्यक्ष अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रधानाचार्य प्रो० परवेज अख्तर ने कहा कि यह बड़े हर्ष की बात है कि मिथिला विश्वविद्यालय अपना स्वर्ण जयंती वर्ष मना रहा है जिसका आज समापन हो रहा है। आज यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस विविध कार्यक्रमों से कई छात्र-छात्राओं के अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानने का मौका मिला। इस विविध कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया है कि जैसे आईपीएल से टीम इंडिया को कई प्रतिभावान खिलाड़ी मिला है ठीक उसी प्रकार विविध कार्यक्रमों से आज महाविद्यालय को मल्टी टैलेंटेड प्रतिभा के रूप में छात्र मिला है। महाविद्यालय आप सबों के बेहतर प्रदर्शन से बहुत खुश महसूस कर रहा है। हम आगे भी आप सभी छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिये समय दर समय कार्यक्रम का आयोजन करते रहेंगे। इस प्रतिस्पर्धी युग में टैलेंटड के जगह अब मल्टीटैलेंटड की ही पूछ होती है। इसीलिए आप सभी अपने शैक्षणिक गतिविधि के साथ-साथ हर सकारात्मक क्षेत्र में अपना आलराउंड प्रदर्शन दें। हमारे सभी शिक्षक व शिक्षिकाएं आप सबों के साथ कदम से कदम मिलाकर आपके प्रतिभा को निखारने व तराशने के लिये प्रतिबद्ध है। आगे उन्होंने कार्यक्रम के समापन समारोह पर सभी विभागों के शिक्षक व शिक्षिकाओं के साथ-साथ शिक्षकेत्तर कर्मियों व सपोर्टिंग स्टॉफ का भी धन्यवाद ज्ञापित किया जिन्होंने अपने अथक मेहनत से इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाया है।
समापन समारोह के अवसर पर महाविद्यालय की सभी वरिष्ठ व कनिष्ठ शिक्षक व शिक्षिकाएं उपस्थित थी जिन्होंने अपने आशीर्वचनों से उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं का हौसला अफजाई किया।
अंत में प्रमाण-पत्र वितरण का आयोजन किया गया। जिसमें विविध कार्यक्रमों के प्रथम तीन विजेताओं के साथ-साथ कार्यक्रम में सम्मिलित सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिये बधाई व शुभकामनाएं दी।
समापन समारोह के प्रभारी की भूमिका में वनस्पति विज्ञान शिक्षक डॉ० सच्चिदानंद मिश्रा व भौतिकी शिक्षक डॉ० दिवाकर नाथ झा उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन मनोविज्ञान की शिक्षिका डॉ० रीता कुमारी ने किया।

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