मशरूम उत्पादन स्वास्थ- सुख, आर्थिक समृद्धि एवं आत्मगौरव का प्रतीक- डा महेन्द्र लाल।

मशरूम उत्पादन स्वास्थ- सुख, आर्थिक समृद्धि एवं आत्मगौरव का प्रतीक- डा महेन्द्र लाल।

मसरूम उत्पादन एवं व्यापार से व्यक्ति अपने परिवार एवं समाज के साथ ही राष्ट्र के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं। समुचित प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन करने से लोग अपने पैरों पर खड़े होकर पा सकते हैं आत्मसम्मान। उक्त बातें ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, दरभंगा की तत्वावधान में दरभंगा के वार्ड नंबर- 3 स्थित बेलादुल्ला मोहल्ला में 21से 30 दिसंबर, 2023 के बीच संचालित 10 दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण शिविर का दीप प्रज्वलित कर विधिवत् उद्घाटन करते हुए सेण्ट- आरसेटी के निदेशक प्रभात कुमार वर्मा ने कही।

निदेशक ने कहा कि स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के लिए आर- सेटी मछली पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, अचार- पापड़, अगरबत्ती तथा सिलाई- कढ़ाई आदि अनेक प्रशिक्षण कुशल एवं अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा निःशुल्क दी जाती है। इन प्रशिक्षणों के लिए आधार कार्ड, बैंक अकाउंट तथा राशन कार्ड या श्रम कार्ड की छाया प्रति तथा फोटो रजिस्ट्रेशन हेतु आवश्यक है। प्रशिक्षण प्राप्त कर व्यक्ति अपनी क्षमता, संसाधन तथा बाजार को ध्यान में रखकर स्वरोजगार कर सकते हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में डा महेन्द्र लाल दास ने कहा कि मशरूम उत्पादन स्वास्थ- सुख, आर्थिक समृद्धि एवं आत्मगौरव का प्रतीक है। इसके उत्पादन एवं व्यापार कर युवा दूसरों को भी रोजगार प्रदान कर सकते हैं।

प्रशिक्षिका प्रतिभा झा ने कहा कि इस दस दिवसीय मशरूम- प्रशिक्षण में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ- साथ मसरूम उत्पादन कार्यों के द्वारा विशेष रूप से व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षु तत्काल मशरुम उत्पादन शुरु कर सकें। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन में न्यूनतम पूंजी, कम जगह, अल्प समय तथा कम श्रम की जरुरत होती है।

स्वागत एवं संचालन करते हुए प्रशिक्षण के संयोजक डा आर एन चौरसिया ने कहा कि यह मशरूम प्रशिक्षण स्थानीय बेलादुल्ला मोहल्ला में 21 से 30 दिसंबर, 2023 के बीच संचालित हो रहा है, जिसमें दरभंगा जिला के 18 से 45 वर्ष के 35 व्यक्ति भाग ले रहे हैं। इसका उत्पादन गेहूं या धान के भूसे या जैविक खाद से होता है, जिसका अवशेष प्राकृतिक खाद के रूप में खेतों में पुनः किया जाता है। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन एवं व्यापार के क्षेत्र में रोजी- रोजगार की असीम संभावनाएं हैं। प्रोटीन, विटामिन्स तथा औषधीय गुणों से भरपूर मशरूम का उत्पादन अब पूरे वर्ष होता है।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विज्ञान- शिक्षिका डा अंजू कुमारी ने कहा कि मसरूम उत्पादन स्वास्थ- रक्षा के साथ- साथ रोजी- रोजगार का भी महत्वपूर्ण साधन बनता जा रहा है। इसके लिए सरकार द्वारा भी सब्सिडी युक्त ऋण दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि मशरूम हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर तथा कैंसर आदि को रोकता है। यह विटामिन डी का उत्तम स्रोत है जो हमारी रोग प्रतिरोध क्षमता को भी बढ़ता है। इस अवसर पर समस्तीपुर जिला के मशरूम प्रशिक्षक कुंदन कुमार झा, संस्कृत- शिक्षक डा चौधरी हेमचंद्र राय आदि ने भी अपने विचार रखे।

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