बीएड विभाग में धूमधाम से मनाया गया 12वां स्थापना दिवस ।

बीएड विभाग में धूमधाम से मनाया गया 12वां स्थापना दिवस ।

एलएनएमयू: शिक्षा की शुरुआत आनंद से होनी चाहिए। छात्रों को प्रेरित करने का कार्य शिक्षकों का है। बीएड के छात्र यह यात्रा खुद से शुरू करें। शिक्षक की पढ़ाई करने वाले छात्र सामान्य छात्रों से अलग होते हैं । इनका दायित्व भी दूसरे छात्रों की तुलना में भिन्न है। शिक्षक राष्ट्र के निर्माता होते हैं, इस कारण आपकी भूमिका महती है । इस दायित्व को आप सभी निभाने वाले हैं। इसलिए आप सबकी चिंतन की धारा उसी ओर जानी चाहिए। उक्त बातें दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा संचालित बीएड (नियमित) विभाग के 12वें स्थापना दिवस सप्ताह कार्यक्रम के समापन सत्र में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अध्यापक शिक्षा की परिकल्पना” विषय पर छात्रों को संबोधित करते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कही। प्रो. सिंह ने कहा आज शिक्षकों को अनेक प्रकार के दायित्वों का निर्वहन – उसे विषय का ज्ञाता, भीड़ को सामना करने की क्षमता, दस्तावेज बनाने की काबिलियत, करना होता है। साथ ही शिक्षक को सामाजिक बदलाव के लिए भी काम करना होता है इसके लिए शिक्षक को अपनी सोच बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा से संस्कार और विद्या से विवेक मिलती है। इस सोच को नई पीढ़ी में साकार करने का दायित्व शिक्षक का ही है। प्रो. सिंह ने कहा कि आत्मबल से दुनिया बदली जा सकती है। शारीरिक शक्ति या धन बाल से दुनिया नहीं बदली जा सकती है । अगर छात्र नियंत्रण गतिमान रहें तो जीवन में जरूर सफलता प्राप्त करेगी।

पटना विश्वविद्यालय के शिक्षा संकायाध्यक्ष प्रो. खगेंद्र कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जीवंत वर्ग की अवधारणा करता है। अध्यापक शिक्षा के सन्दर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कहती है कि शिक्षकों के आदर को पुनर्स्थापित करना पहला लक्ष्य है । शिक्षकों को अपने रवैये को बदलना होगा विद्यालय में वह माहौल बनाना होगा जिससे बच्चा स्वयं स्कूल जाना चाहे । राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा को समग्रता में देखता है। ज्ञान को बहु-विषयक (मल्टी डिसिप्लीनरी) मानता है। इसलिए विज्ञान के शिक्षार्थी समाज विज्ञान और साहित्य भी पढ़ सकें इसकी व्यवस्था करने की बात करता है। अब शिक्षकों के कर्तव्य हैं कि वे छात्रों को रचनात्मक, नवाचारी बनाने का कार्य करें। प्रो. कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिशु देख-रेख और शिक्षा को संस्थायी रूप देता है जो पहले सिर्फ निजी स्कूलों तक सीमित था।

दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. हरे कृष्ण सिंह ने कहा कि स्थापना दिवस को अवतरण दिवस के रूप में मनाने की जरूरत है। अवतरण दिवस जीवन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है। इस दिन हम क्या खोया, क्या पाया का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हैं । शिक्षक का काम सिर्फ स्कूल में बच्चों को पढ़ना ही नहीं है बल्कि समाज को भी शिक्षित करना है ।

कार्यक्रम के प्रारंभ में बीएड (नियमित) के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार मिलन ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बीएड विभाग 12 वर्षों में बहुत कुछ प्राप्त किया है। प्रति वर्ष इसने विकास ही किया है ।यह आगे आगे भी इसी तरह से निरंतर उपलब्धियों को प्राप्त करता रहेगा। विभाग में छात्रों को शिक्षण के साथ कौशल एवं व्यक्तित्व विकास पर भी जोर देते हैं। इसलिए आज बीएड (नियमित) विभाग का पूरे बिहार में एक अलग पहचान बना है। मंच संचालन डॉ. निधि वत्स और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मिर्ज़ा रूहुल्लाह बेग ने किया।

समापन सत्र में डॉ. शुभ्रा, डॉ. कुमारी स्वर्ण रेखा, उदय कुमार, कुमार सत्यम, गोविन्द कुमार, डॉ. जय शंकर सिंह, डॉ. रेशमा तबस्सुम, डॉ. कुमारी बबिता रानी, शिक्षकेत्तर कर्मी अशोक कुमार चौधरी, संजय कुमार, बीएड द्वितीय व प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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