दरभंगा में लगातार तीसरी बार एक ही घर को अतिक्रमण मुक्त कराने से परेशान अतिक्रमण कारी संजीव चौधरी ने आत्म दाह करने की कोशिश की। लेकिन स्थानीय व प्रशासनिक पहल से संजीव चौधरी की जान बच सकी। घटना के बाद घायल को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लाया गया। जहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए DMCH रेफर कर दिया गया। DMCH पहुंचने के बाद संजीव चौधरी की हालत नाजुक देखते हुए उन्होंने पटना रेफर कर दिया गया है। लेकिन पटना जाने में अधिक समय लगने के डर से परिजन उन्हें निजी नर्सिंग होम में इलाज करवा रहे है। वही घटना के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है।
घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि कमतौल थाना क्षेत्र के पिंडारुछ गांव में बुधवार को केवटी सीओ चंदन कुमार हाई कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण मुक्त करने पहुंचे। उसी क्रम में कथित अतिक्रमण कारी संजीव चौधरी ने सीओ से कहा कि एक ही घर को तीन तीन बार क्यों प्रशासन के द्वारा तोड़ा जा रहा है। जिसपर सीओ ने कहा कि कोर्ट का आदेश है। इस बात से क्षुब्ध होकर संजीव चौधरी ने शरीर पर तेल छिड़कर आग लगा लिया। तथा मौके पर मौजूद फोर्स ने उसे बचाने के क्रम में स्वयं झुलस गया।
वहीं आत्मदाह करने वाले संजीव चौधरी का नाजुक स्थिति देख परिजनों ने इलाज के लिए डीएमसीएच ले गया। जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच रेफर कर दिया।वही घायल अंचल गार्ड देव कुमार सिंह ने बताया कि हमलोग अंचलधिकारी के साथ अतिक्रमण खाली करवाने गए थे। जिसमें जिला से भी पुलिस बल को मंगवाया गया था। गाड़ी एक जगह मंदिर के पास रुका। सभी लोग स्थल के लिए आगे बढ़े। सीओ और अमीन को बुलाने के लिए अंदर गए तो संजीव चौधरी हाथ में आग का गोला जैसा रखकर हाथ फैलाए हुए दौड़ रहे थे। जिससे भगदड़ हो जाए। इसी क्रम में हम गिर गए तो वह हमको पकड़ लिए। इसके बाद दो फोर्स के लोग हमको खींच कर अलग किया। उसमे हमारा वर्दी जल गई। लेकिन हम बच गए। हमारे साथ एक और गार्ड है राम कैलाश यादव को भी थोड़ी सी चोट आई है।
बताते चले कि सुमित चौधरी, नागेन्द्र चौधरी और संजीव चौधरी तीनों फरिक के साथ जमीनी विवाद चल रहा है। इस कारण कोर्ट के आदेश पर स्थानीय प्रशासन ने केवटी के तत्कालीन सीओ रहे संतोष कुमार सुमन ने वर्ष 2019 में संजीव चौधरी के घर तोड़ अतिक्रमण मुक्त कराया था। फिर पांच महीना पूर्व सीओ बसंत चौधरी ने संजीव के घर को तोड़ अतिक्रमण मुक्त किया था। फिर आज सीओ चंदन कुमार ने संजीव के घर को ही तोड़ने गया था। जिस कारण प्रशासन की रवैया से तंग आकर संजीव ने इस प्रकार का कदम उठाया। ग्रामीणों की माने तो संजीव इतना गरीब है कि डीलर के यहां से मिल रहे अनाज के बल पर बाल बच्चे को भरण पोषण करता है।

