दरभंगा।डीएमसीएच परिसर में एम्स निर्माण हेतु मिट्टी भराई का काम चल रहा है।मिट्टी भराई कार्य करोड़ों की लागत से बड़ी धूमधाम से शुरू किया गया।यह कार्य सभी तरह की कागजी कार्यवाही के बाद ही शुरू किया गया होगा।लेकिन अचानक एक खबर सबको सकते में डाल दिया है। अशोक पेपर मिल मजदूर यूनियन के अध्यक्ष सह लोजपा (र) के राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर शाहनवाज अहमद कैफी ने एपीएम परिसर में एम्स निर्माण की कथित घोषणा को विधवा विलाप करार देते हुए कहा है कि जिसे देखो वह एपीएम में ही राजनीति करने चला आता है। उन्होंने बड़े कड़े शब्दों में भोला यादव के उस बयान पर उपहास करते हुए कहा की राजनीति के माहिर खिलाड़ी होते हुए बचकाना हरकत कर रहे है। उन्होंने उक्त निर्णय पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरकार को अपने इस निर्णय से एम्स के निर्माण एवं अशोक पेपर मिल के मजदूरों की मांगों को एक साथ फंसाना चाहती है। उन्होंने सवाल किया है कि मिल का मालिक अभी भी एमसीएफएल कंपनी बना हुआ है। साथ ही वर्ष 2012 में ही मजदूरों के पक्ष में पीएफ कमिशनर ने मिल को बंधक कर लिया है। एमसीएफएल की देनदारी को लेकर कोलकाता हाई कोर्ट भी मिल को सील कर चुका है। इसके पूर्व आईडीबीआई और यूबीआई बैंक ने भी अपनी बकाया राशि को लेकर मिल को सील कर चुका है। मिल के मजदूरों की बकाया भुगतान एवं मिल को एमसीएफएल के चंगुल से निकलने के लिए हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है सो अलग। ऐसे में राज्य सरकार को अधिकार ही नही है कि इस मिल की ज़मीन को अन्य संस्थान को आवंटित कर दे। क्या सरकार ने एमसीएफएल से मिल को वापस लेकर उसपर अपना स्वामित्व ले लिया है, और अगर नही तो ये जनता को बरगलाने वाला निर्णय नही है तो और क्या है।
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