दो गज दूरी बहुत है जरूरी, मास्क पहने, तब घर से निकलें।
दरभंगा। कोरोना ने देशभर के लोग परेशान हैं । संक्रमण में उतार-चढ़ाव लगातार जारी है। कुछ जगहों पर तो संक्रमण के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर कम हो गए हैं। जिन क्षेत्रों में कोरोना के मामले कम हो गए हैं, वहां लोग समझ रहे हैं कि अब संक्रमण नहीं होगा|, इस बाबत डीएमसीएच के वरीय चिकित्सक डॉ जी एन दूबे कहते हैं, ‘दूसरी लहर अभी भी जारी है, हम उससे अभी पार नहीं हुए हैं। वैक्सीन लगवाने के बाद भी हमें सभी कोरोना नियमों का पालन करना है। केस बेशक कम हुए हैं, लेकिन खत्म नहीं हुए हैं।’ इधर पोस्ट कोविड ने भी लोगों को अलग परेशान करके रखा हुआ है। इसमें लोगों को तरह-तरह की समस्याएं हो रही हैं, जिसमें शुगर का बढ़ना भी शामिल है।
जिन लोगों को कोविड के दौरान शुगर की बीमारी हुई, क्या यह बनी रहेगी या ठीक हो जाएगी?
डॉ दूबे कहते हैं, ‘कोविड के ऊपर अभी भी कई शोध चल रहे हैं, अभी तक इसका सही उत्तर नहीं मिला है कि लंबा कोविड लक्षण कितने दिनों तक रहेंगे। अभी तक विशेषज्ञ बता रहे हैं कि जितना पता चला है, वह यही है कि तकरीबन 12 महीने यानी एक साल तक ये लक्षण रह सकते हैं। जहां तक शुगर की बात है, जिन लोगों को बॉर्डर लाइन शुगर है, उन लोगों को कोविड हुआ है तो उनका शुगर, डायबिटिक रेंज में आ गया है। कुछ लोगों को स्टेरॉयड देने की वजह से भी शुगर बढ़ा है, यह सामान्य हो सकता है या हो गया है। लेकिन जिन लोगों को कोविड की वजह से शुगर हुआ है, जो प्री-डायबिटीक थे, उनकी मॉनिटरिंग और रेग्युलर चेकअप होना बेहद जरूरी है।’
कुछ लोग एंटीबॉडी टेस्ट करवाते हैं
डॉ. दूबे के अनुसार ‘वैक्सीन के बाद जो इम्ययुनिटी आती है, वह एंटीबॉडीज के द्वारा भी आती है। एंटीबॉडी टेस्ट में बस न्यूट्रेलाइजिंग एंटीबॉडीज बताई जाती हैं। एंटीबॉडीज का होना बिल्कुल ये नहीं कहता है कि वैक्सीन कम रही या ज्यादा रही। वैक्सीनेशन केवल एक तरीका है, इसके अलावा भी कई तरीकों से एंटीबॉडी बनती है। केवल एंटीबॉडी टेस्ट पर न जाएं। बस खुद को सुरक्षित रखें, वैक्सीन लगवाएं और लगवाने के बाद भी कोविड नियमों का पालन जरूर करें।’
क्या होती है हर्ड इम्युनिटी
दुनिया में कोरोना से लड़ने के दो बेहद अलग-अलग हथियार हैं| एक कहता है घर में रहो, दूसरा कहता है घर से निकल जाओ| बात भी वाजिब है| घर में इंसान आखिर कब तक रह सकता है| क्योंकि इससे तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था ही बैठ जाएगी| लोगों की नौकरियां जाने लगेंगी| खाने-पीने के लाले पड़ जाएंगे| लोग डिप्रेशन में आ सकते हैं. तो फिर करें क्या| कोरोना से लड़ने का दूसरा रास्ता कहता है कि घर से निकल जाओ| विशेषज्ञों के मुताबिक लॉकडाउन तभी तक कारगर है जब तक लोग घरों में कैद हैं| जैसे ही लोग घरों से निकलेंगे ये संक्रमण उन्हें जकड़ लेगा| इसलिए छुपे नहीं बल्कि इसका सामना करें| जितने ज़्यादा लोग इससे संक्रमित होंगे| इंसानी जिस्म में इससे लड़ने की उतनी ज़्यादा ताकत पैदा होगी| इसे ही हर्ड इम्युनिटी कहते हैं|
क्या हम हर्ड इम्युनिटी की तरफ बढ़ना शुरू हो चुके हैं:
डॉ. दूबे कहते हैं, ‘हर्ड इम्युनिटी बहुत सारी चीजों पर निर्भर करती है। जैसे पहले कितने लोगों को इंफेक्शन (संक्रमण) हो चुका है और कितने लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। हमें हर्ड इम्युनिटी को सोचकर कभी भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। मास्क की बार-बार बात इसलिए करते हैं, क्योंकि मास्क न केवल हमें बचाता है बल्कि दूसरे लोगों को भी बचाता है, ताकि अगर एक व्यक्ति को संक्रमण है, तो वो दूसरे व्यक्ति को संक्रमित न कर पाए। हमारा यही प्रयास होना चाहिए कि हमारी वजह से कोई दूसरा संक्रमित न हो पाए।’
अगर तीसरी लहर आती है तो हमें क्या करना है:
डॉ. दूबे के अनुसार, ‘अगर बात करें कोविड की दूसरे लहर की तो यह फरवरी में शुरू हुई थी। उसके बाद टीकाकरण अभियान तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन अभी और ध्यान रखना है। अभी कोरोना की दूसरी लहर से बाहर नहीं निकले हैं। अगर कोरोना टीकाकरण अभियान को अच्छे से आगे बढ़ाएं, तो हो सकता है तीसरी लहर की सम्भावना कम है। लिहाजा जीतने अधिक लोग टीका ले लेंगे, उस अनुसार तीसरी लहर जनमानस को प्रभावित करेगी। इस दौरान हम सबको एहतियात बरतना होगा, क्योंकि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। हम भी सरकार का साथ दें और ‘दो गज की दूरी, बहुत है जरूरी’ पर अमल करें।’