अब महिला जनप्रतिनिधि के पति या प्रतिनिधि नहीं लेंगे सरकारी बैठकों में भाग

अब महिला जनप्रतिनिधि के पति या प्रतिनिधि नहीं लेंगे सरकारी बैठकों में भाग

 

अधिकारी के कार्यालय व पंचायत के कामों को स्वंय निष्पादन करेंगी महिला जनप्रतिनिधि

 

दरभंगा।त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में महिला जनप्रतिनिधियों के पति या प्रतिनिधि अधिकारियों के कार्यालय में पंचायत के कामों को निष्पादन करने नहीं जा सकेंगे।अब वे ग्राम पंचायत,पंचायत समिति,जिला परिषद एवं ग्राम कचहरी से संबंधित होने वाले बैठकों में भी नहीं भाग लेंगे।अब महिला जनप्रतिनिधि को स्वयं ही कार्यालय में जाकर पंचायत के कामों को निष्पादन व अपने दायित्व का निर्वहन करना होगा।
सरकार के इस निर्देश को लागू करने के लिए पंचायती राज विभाग ने जिले के सभी पंचायत सचिव,ग्राम कचहरी के सचिव,न्याय मित्र,तकनीकी सहायक,लेखापाल सह आइटी सहायक,पंचायत एवं प्रखंड के कार्यपालक सहायक,बीडीओ समेत संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर अनुपालन करने का निर्देश दिया है।इस संबंध में पंचायती राज विभाग ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के जनप्रतिनिधि प्रखंड प्रमुख, उपप्रमुख,जिला परिषद सदस्य,पंचायत समिति सदस्य, मुखिया,सरपंच,वार्ड सदस्य,ग्राम कचहरी के पंच को पालन करने हेतु भी निर्देश दिया है।इस नियम को जिला पंचायती राज पदाधिकारी आलोक राज ने अपने कार्यालय से अमल भी शुरू कर दिया है।बताते चलें कि इससे पूर्व त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के महिला जनप्रतिनिधि के बदले अधिकांश बैठक व सरकारी कार्यालय में उनके पति ही काम निपटाते थे।महिला जनप्रतिनिधि के कार्यालय एवं उनके कुर्सी पर उनके पति अथवा प्रतिनिधि विराजमान रहते थे। अधिकांश महिला जनप्रतिनिधि जिला तो दूर प्रखंड के सरकारी कार्यालय भी नहीं देख पाती थी।अब जिला पंचायती राज पदाधिकारी आलोक राज से मिलकर अपनी बात रखने की महत्वाकांक्षा रखने वाले प्रमुख पति,उपप्रमुख पति, मुखिया पति,समिति पति,जिला परिषद सदस्य पति,सरपंच पति,वार्ड सदस्य पति बैरंग वापस लौट जाते हैं।डीपीआरओ आलोक राज ने अपने कार्यालय के कर्मी को सख्त हिदायत दे रखी है कि महिला जनप्रतिनिधि के कामों को लेकर उनके पति अथवा प्रतिनिधि कार्यालय नहीं आवे। इस संबंध में जिला पंचायती राज पदाधिकारी आलोक राज ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में सरकार ने महिला को आरक्षण देकर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है और सरकार का यह सपना तब तक पूरा नहीं होगा जब तक महिला जनप्रतिनिधि अपने अधिकार व दायित्वों के निर्वहन के लिए अपना कदम स्वंय आगे नहीं बढ़ाएगी।

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