विश्वविद्यालय हिंदी विभाग में पत्रकारिता प्रायोगिक प्रशिक्षण शिविर की हुई शुरुआत।

विश्वविद्यालय हिंदी विभाग में पत्रकारिता प्रायोगिक प्रशिक्षण शिविर की हुई शुरुआत।

दरभंगा: विश्वविद्यालय हिंदी विभाग में पत्रिकारिता एवं जनसंचार सर्टिफिकेट कोर्स के 2022–23 सत्र का प्रारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार की उपस्थिति में प्रबोधन कार्यक्रम से हुआ।

इस अवसर पर छात्र–छात्राओं को संबोधित करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार ने कहा कि पत्रकारिता का बड़ा दायित्व है समाज में। समाज में जो किसी न किसी रूप में नीचे हैं, हाशिए पर हैं, उनको उठाने का दायित्व हमेशा सच्ची पत्रकारिता की पहचान है।

उन्होंने आगे कहा कि एक छोटा–सा समाचार भी बहुत प्रभावकारी हो सकता है। न्याय दिलाने की प्रक्रिया में पत्रकारिता का अभूतपूर्व योगदान हो सकता है, इसका ध्यान रखना चाहिए। प्रेस लॉ को ध्यान में रखकर जनता की सेवा करना प्राथमिक उद्देश्य होना चाहिए। इसी में आपके ज्ञान की, इस कोर्स की सार्थकता है।

मौके पर संकायाध्यक्ष ए. के. बच्चन ने कहा कि पत्रकारिता निस्वार्थ सेवा है, समाज के प्रत्येक व्यक्ति की कठनाइयों को प्रकाश में लाने का दायित्व पत्रकारों के ही कंधे पर है। बतौर पत्रकार छात्र–हित पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पत्रकारों को समाज निर्माण में अपनी भूमिका को गंभीरता से लेना होगा।

प्रो. सुरेंद्र सुमन ने कहा कि पत्रकारिता की राष्ट्र निर्माण में बड़ी भूमिका है। देश को परतंत्रता की बेड़ियों से स्वाधीन कराने में पत्रकारिता का अविस्मरणीय योगदान था।

अखबार कभी जनशत्रुओं का रखवाला नहीं हो सकता। आज के दौर में पत्रकारिता बहुत बदनाम हो गई है। पत्रकारों को सत्ता का चाकर नहीं होना चाहिए।

आज ऐसी स्थिति है कि जो जनपक्षधर पत्रकार हैं उनको सत्ता के क्रूर दमन का शिकार होना पड़ रहा है। वास्तव में, सत्ता से टकराने की हिम्मत हो तभी सच्चे पत्रकार बन सकते हैं।

वहीं, सीसीडीसी महेश सिन्हा ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र की आत्मा है, रीढ़ है। इसके बिना देश नहीं चल सकता। स्वाधीनता आंदोलन के समय से ही पत्रकरिता ने देशवासियों के लिए तेज शस्त्र के रूप में काम किया है।

आज की पत्रकारिता मूल उद्देश को नजरंदाज करके गैर जरूरी चमक–धमक में उलझी हुई है। पत्रकारिता के छात्र होने के नाते बहुत सूक्ष्मता से देखना होगा कि राष्ट्र हित में क्या है? क्या दिखाना, क्या लिखना ज्यादा महत्वपूर्ण है? इस बोध को बचाना होगा।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ विद्वान शिक्षक प्रो. प्रीतम झा ने कहा कि पत्रकारिता मानव जीवन में नमक की तरह है। वह एक साथ सेवा और व्यवसाय दोनों है। बल्कि सेवा के अधिक करीब है।

यह सर्टिफिकेट कोर्स बहुत उपयोगी है। आगामी भविष्य में पत्रकारिता से एम.ए कोर्स भी लाने का प्रयास किया जाएगा।

विभागीय शिक्षिका डॉ. मंजरी खरे ने कहा कि जागरूकता का प्रसार करना पत्रकारिता का बड़ा काम है। पत्रकारिता एक मिशन है। इस प्रशिक्षण को गंभीरता से लेना चाहिए।

डॉ. संतोष दत्त झा ने पत्रकारिता को एक बड़ी विधा के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि पत्रकारिता के छात्रों पर बड़े बदलाव लाने की जिम्मेदारी है। आप बतौर पत्रकार हाशिए के लोग की आवाज बन सके तो यह आपके पत्रकारिता की सफलता है।

कार्यक्रम में शिक्षिका अनुराधा प्रसाद सहित रागिनी कुमारी, वरुण कुमार चौधरी, सुधीर कुमार, शोध छात्र समीर, दुर्गानंद, कंचन, ज्योति, मलय, ज्योति, पुष्पा व अन्य छात्र–छात्राओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

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