एलएनएमयू के 49 वें स्थापना वर्ष एवं स्वर्ण जयंती वर्ष के प्रवेश पर्व पर ऑनलाइन उद्घाटन राज्यपाल ने किया

दरभंगा।ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के 49 वें स्थापना वर्ष एवं स्वर्ण जयंती वर्ष के प्रवेश पर्व का आज गुरुवार को समारोहपूर्वक ऑनलाइन उद्घाटन बिहार के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति फागू चौहान ने किया। श्री चौहान ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि सत्र 2021-22 में विश्वविद्यालय की स्वर्ण जयंती और ललित बाबू की जन्मशती का सुखद संयोग है। उन्होंने कहा कि अपनी आधी सदी के सफर में विश्वविद्यालय शिक्षा प्रणाली एवं संकायों के अन्तर्गत उल्लेखनीय मानक स्थापित करने में सफल रहा है। राज्यपाल ने कोरोना काल में ऑनलाइन वर्गों के संचालन का विशेष रूप से उल्लेख किया। पाँच सौ से अधिक इंटरऐक्टिव क्लासेज के संचालित होने और विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर चार हजार पाठ्य सामग्री के उपलब्ध होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने ललित बाबू का स्मरण करते हुए मिथिला में रेल, मिथिला चित्रकला, मैथिली भाषा और कोशी नहर योजना के प्रसंग में ललित बाबू के योगदान को रेखांकित किया। श्री चौहान ने कहा कि बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है किंतु साक्षरता, स्वास्थ्य, सकल घरेलू उत्पाद आदि क्षेत्रों में हम राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे हैं। बिहार की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है, इसलिए हमें कृषि विकास के प्रयासों को और अधिक तेज करना होगा।
समारोह के मुख्य अतिथि बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने ऑनलाइन माध्यम से अपना उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि मिथिला विद्वानों की भूमि रही है। ऐसी महान भूमि में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय स्थापित है और इसी महान भूमि के सपूत हैं स्वर्गीय ललित नारायण मिश्र। श्री चौधरी ने अपने को विश्वविद्यालय के स्थापना काल का छात्र बताया। और कहा कि इसके विकास में सहयोग से उन्हें खुशी होगी। उन्होंने आगे कहा कि छात्रों के चेहरे पर अध्यापन से सन्तुष्टि का भाव होना चाहिए। शिक्षा मंत्री ने नैक से ससमय मूल्यांकन पर जोर दिया। श्री चौधरी ने ललित बाबू का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि वे ज्योतिपुंज थे तथा स्नेहिल स्वभाव के थे। वे मिथिला के विकास के लिए समर्पित थे।
इस अवसर पर कुलाधिपति, शिक्षा मंत्री एवं आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो० सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आज विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के पचासवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तथा आगामी 2 फरवरी 2022 को ललित बाबू की जन्मशती है, इसलिए हमने इस सत्र को विश्वविद्यालय की स्वर्ण जयंती एवं ललित बाबू की जन्मशती पर एकाग्र किया है। प्रो० सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि शोध-कार्यों का प्रकाशन, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन विश्वविद्यालय की नियमित गतिविधियाँ हैं। कोरोना महामारी के इस भयावह दौर में हमने ऑनलाइन वर्गों के संचालन में कीर्तिमान स्थापित किया है। इस संदर्भ में हम एक व्यापक डिजिटल प्लेटफार्म का निर्माण करने जा रहे हैं। प्रो० सिंह ने आगे कहा कि भूमंडलीकरण के इस युग में हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए कृतसंकल्पित हैं, ताकि हमारे छात्र-छात्राएँ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने सूचित किया कि शोध की गुणवत्ता में अभिवृद्धि के लिए ऐंटी-प्लैगरिज्म सॉफ्टवेयर लगवाया जा चुका है तथा वह गत जनवरी से कार्य कर रहा है। उन्होंने बिहार स्टार्टअप नीति-2017, यू०जी०सी० की स्टार्टअप योजना और यूनिसेफ तथा आई०सी०एस०एस०आर० कोलैबोरेशन के तहत विकास अनुदानों का विशेषरूप से उल्लेख किया। प्रो० सिंह ने ससमय परीक्षा के आयोजन एवं परीक्षाफल के प्रकाशन, डिग्री पर डिजिटल हस्ताक्षर की स्वीकृति, पुस्तकालय ऑटोमेशन एवं शोध कोषांग की स्थापना का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ पूर्वाह्न ग्यारह बजे विश्वविद्यालय परिसर स्थित ललित बाबू, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर आदि महापुरुषों की प्रतिमाओं पर कुलपति, प्रति कुलपति, कुलसचिव एवं अन्य पदाधिकारियों के माल्यार्पण से हुआ। उद्घाटन सत्र में ललित कला संकाय के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र का समापन प्रति कुलपति प्रो० डॉली सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। इस क्रम में प्रो० सिन्हा ने कुलाधिपति, शिक्षा मंत्री, गतिशील नेतृत्वकारी कुलपति एवं अधिषद् और अभिषद् के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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