भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता को  संस्कृत के विना जानना असंभव : प्रधानाचार्य।

भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता को संस्कृत के विना जानना असंभव : प्रधानाचार्य।

दरभंगा: भाषा ज्ञान आपस में व्यवहार करने से बढ़ता है। जिस भाषा को सीख रहे है उस भाषा में कम से कम दस वाक्य प्रतिदिन लिखना एवं बोलना चाहिए उससे ही भाषा ज्ञान में वृद्धि हो सकती है, नहीं तो सीखी हुई चीज भी व्यक्ति भूल सकता है। अध्यापक सहयोग कर सकते हैं परंतु सीखना छात्रों को ही पड़ता है। आज इंजिनियर डाक्टर भी संस्कृत सीखने की इच्छा रखते हैं। ये सारी बातें सी. एम. कॉलेज में चल रहे दस दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. शशिनाथ झा ने कही।

उन्होंने कहा कि संस्कृत सीखने से अन्य भाषा सीखने में भी सहयोग मिलता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. मुश्ताक अहमद ने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता को संस्कृत के विना जानना असंभव है, क्योंकि संस्कृत ही इसका आधार है। भाषा ज्ञान अभ्यास करने से आता है। जो कुछ भी हमारे आस पास दिख रहा है उन सभी चीजों का संस्कृत जानने का प्रयास करते रहने से छात्रों के संस्कृत भाषा का ज्ञान बढता रहेगा ।

संस्कृत पढ़ने से दक्षिण भारतीय भाषाओं को सीखना भी अत्यंत आसान हो जाता है। संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय का इस कार्यक्रम में आना महाविद्यालय एवं संस्कृत विभाग दोनों के लिये ही अत्यंत महत्वपूर्ण है, इससे महाविद्यालय का भी सम्मान बढ़ा है।

प्रधानाचार्य ने संभाषण शिविर के सफल संचालन करने पर संयोजक संचालक समेत संस्कृत विभाग के सभी प्राध्यापकों को बधाई दी तथा भविष्य में भी इस तरह का कार्यक्रम करने हेतु उत्साहवर्द्धन किया। बतौर विशिष्ट अतिथि बोल रहे विश्वेश्वर सिंह जनता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. जीवानन्द झा ने संस्कृत के महत्व को रेखांकित किया। विदित हो कि इस कार्यक्रम में अनुभवकथन करते हुए स्नातक प्रथमवर्ष के छात्र अभिजीत कुमार एवं रश्मि कुमारी की प्रवाहमयी संस्कृत को सुनकर अतिथिगण गदगद हो गए।

अतिथियों के सम्मान में स्वागत भाषण करते हुए संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. संजीत कुमार झा ने कहा कि यह समापन नहीं बल्कि आरम्भ है, क्योंकि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली द्वारा सी. एम. कॉलेज, दरभंगा में संचालित अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केन्द्र का नामांकन प्रारम्भ हो चूका है, जिसमें दसवीं पास कोइ भी व्यक्ति सर्टिफिकेट कोर्स एवं डिप्लोमा कोर्स में नामांकन करवाकर साल भर संस्कृत सीख सकता है। 30 तारीख तक ऑनलाइन माध्यम से नामांकन कराया जा सकता है। अनौपचारिक संस्कृत केन्द्र के प्राध्यापक श्री अमित कुमार झा के संचालन में हुए कार्यक्रम में मंगलाचरण स्नातक छात्र अभिजीत कुमार ने, मनमोहक स्वागतगान आशुतोष कुमार ने तथा धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत विभाग के प्राध्यापक सह संयोजक डॉ. शशिभूषण भट्ट ने किया। कार्यक्रम में डॉ. महेन्द्र लाल दास समेत सौ से अधिक छात्र छात्राएं उपस्थित थे।

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