वन महोत्सव के अवसर पर आयुक्त, डीएम, जिप अध्यक्ष एवं डीडीसी ने लगाये पौधे।

वन महोत्सव के अवसर पर आयुक्त, डीएम, जिप अध्यक्ष एवं डीडीसी ने लगाये पौधे।

दरभंगा: दरभंगा प्रेक्षागृह में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आयोजित वन महोत्सव, 2023 का शुभारंभ आयुक्त, जिलाधिकारी, जिप अध्यक्ष, डीडीसी, डीएफओ., एसडीओ एवं सहायक समाहर्त्ता के कर-कमलों से दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

वन प्रमण्डल पदाधिकारी, दरभंगा रूचि सिंह द्वारा आयुक्त महोदय, जिलाधिकारी एवं जिला परिषद् अध्यक्ष के साथ सभी आगत अतिथियों को पौधा प्रदान कर उनका हार्दिक अभिनंदन किया गया।
उन्होंने अपने स्वागत भाषण में कहा कि 1950 के दशक में पहली बार पर्यावरण एवं पेड़-पौधों के प्रति लोगों को संवेदनशील बनाने के लिए वन महोत्सव आयोजन की पहल की गई और तब से सम्पूर्ण भारत वर्ष में प्रत्येक वर्ष वन महोत्सव का आयोजन कर लोगों को वृक्षारोपण के लिए जागरूक किया जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि पेड़ से हमें फल, फूल, इमारती लकड़ियाँ, ऑक्सीजन जैसे बुनियादी लाभ तो मिलता ही है, इसके साथ ही पेड़-पौधे पर्यावरण का अभिन्न अंग हैं और इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे वायु एवं जल को स्वच्छ रखने, मिट्टी के कटाव को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि दरभंगा को इसके पूर्वजों ने अनेक तालाब, पोखर विरासत में दिये हैं और हमारी आपकी नैतिक जिम्मेवारी है कि हम आने वाली पीढ़ियों को भी यह विरासत सौपें।

उन्होंने कहा कि हर बार की तरह इस बार भी हम बिहार सरकार के जल-जीवन-हरियाली मिशन के अन्तर्गत एक लक्ष्य लेकर आज से वृक्षारोपण की शुरूआत कर रहे हैं। उन्होंने जीविका, कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग एवं अन्य संबंधित विभाग को इसमें सहयोग देने का जिक्र किया।

इसके पश्चात् आयुक्त, दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा, जिलाधिकारी, दरभंगा, जिला परिषद् अध्यक्ष, उप विकास आयुक्त, अनुमण्डल पदाधिकारी सदर, सहायक समाहर्त्ता, वन प्रमण्डल पदाधिकारी एवं उप निदेशक, जन सम्पर्क द्वारा वृक्षारोपण कर दरभंगा जिले में वृक्षारोपण अभियान की शुरूआत की गयी।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी राजीव रौशन ने कहा कि आज पूरे बिहार में वन महोत्सव मनाया जा रहा है, उसी कड़ी में दरभंगा जिला में भी वन महोत्सव का आयोजन किया गया है।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में कलाकारों एवं बच्चों ने अपने अभिनय प्रदर्शन के माध्यम से बताया कि पेड़-पौधें भी हमसे बहुत सारी बातें करना चाहते हैं। अपनी तकलीफ बताना चाहते हैं और उनके प्रति हमारी कितनी संवेदना होनी चाहिए, इस बात को समझने की जरूरत है। यह सिर्फ वन महोत्सव नहीं है, यह हमारी मानव सभ्यता एवं मानव अस्तित्व को बचाये रखने का उत्सव है। हमने मानव सभ्यता में इतनी तरक्की की है, विकास के इतने पायदान चढ़ें हैं, वह सब अधूरी रह जाएगी, वह सब बेमानी हो जाएंगे, अगर हम आने वाले समय में अपनी संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा नहीं कर सकेंगे। वन, पर्यावरण एवं जलवायु एक दुसरे से जुड़े हुए हैं और इससे मानव का अस्तित्व जुड़ा हुआ है, जो वास्तव में आज संकट में है।

वन महोत्सव सिर्फ पेड़ों को बचाने के लिए नहीं, बल्कि मानव जीवन को बचाने के लिए कर रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि हम पेड़, पौधे, हरियाली और प्रकृतिक के साथ कदम से कदम से मिलाकर चलें, नहीं तो विकास की होड़ में कहीं न कहीं प्रकृति का साथ छुट जाएगा, प्रकृति का छूटना मानव के अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न कर देगा।
उन्होंने कहा कि प्रकाश संश्लेषण क्रिया के माध्यम से वृक्ष पर्यावरण से कार्बन डाई-ऑक्साइड लेकर हमें ऑक्सीजन देते हैं, जो प्राण-वायु है और जब से हम औद्योगिक क्रांति के क्षेत्र में प्रवेश किये हैं, हमारे पर्यावरण में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा तेजी से बढ़ती जा रही है, जो इस खतरे का संकेत है। विगत डेढ़ सौ साल में कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा पर्यावरण में दोगुनी हो गयी है, अगर यही रफ्तार रहा तो हमारा जीवन आने वाले समय में कठिन और असंभव हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि हम मौसम के चक्र में हो रहे बदलाव को हम देख रहें हैं किस प्रकार कभी सुखा और कभी बाढ़ की चुनौतियाँ आ रही हैं और प्रकृति अपने क्रोध को प्रकट कर रही है, प्रकृति हमें कुछ समझाना चाह रही है, इसलिए हमें जागरूक एवं सचेत होने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति ने कहा है कि पौधा लगाने का सही समय 20 साल पूर्व था और दुसरा सही समय आज है, इसलिए हमें बिल्कुल विलम्ब नहीं करना चाहिए और अब तेजी से वृक्षारोपण करना चाहिए। अगर हम प्रकृति की और ध्यान नहीं देगे, तो वास्तव में हमलोगों का भविष्य बादलों से घिरा होगा।

उन्होंने राष्ट्र कवि जय शंकर प्रसाद द्वारा रचित नाटक – ध्रुवस्वामिनी की उक्ति को दुहराते हुए कहा कि ’’जिनका भविष्य बादलों से घिरा हो, उनकी बुद्धि बिजली सी चमकनी चाहिए’’ इसलिए हमलोगों को यानी वर्तमान पीढ़ी को अपने कर्तव्य के प्रति जागृत होना पड़ेगा।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए आयुक्त, दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा मनीष कुमार ने कहा कि यह प्रशन्नता की बात है कि पर्यावरण के क्षेत्र में बिहार आज सम्पूर्ण देश को एक दिशा दे रहा है।
जल-जीवन-हरियाली अभियान के अन्तर्गत पर्यावरण संतुलन के लिए बेहतर कार्य किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रारंभ होने से वन अच्छादन का प्रतिशत् 09 से बढ़कर 15 हो गया है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की दो चीजे पृथ्वी पर रह जाएगी, एक कहे हुए शब्द और दुसरा लगाये गये पेड़। उन्होंने बच्चों को अपने जीवनकाल में कम से कम 100 वृक्ष लगाने हेतु संकल्प दिलवाया।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा पूरे बिहार में व दरभंगा में वन महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रत्येक व्यक्ति को, प्रत्येक बच्चों को कम से कम 10 वृक्ष लगाना चाहिए। सरकार भी अभी सबसे ज्यादा पर्यावरण पर ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि दरभंगा जिला जल-जीवन-हरियाली अभियान एवं अमृत महोत्सव अन्तर्गत तालाब के जीर्णोद्धार एवं वृक्षारोपण अभियान में पूरे देश में पहला स्थान बनाये हुए है, इसके लिए जिला प्रशासन धन्यवाद के पात्र है।
उन्होंने कहा कि प्रो. विद्यानाथ झा ने बताया कि पीपल, पाकड़, बरगद, नीम, आँवला के वृक्ष जीवनदायी होते हैं, तो हम चाहेंगे सभी धर्म स्थलों पर ये वृक्ष लगाये जाएं।
उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन उन्हें 5 एकड़ जमीन वृक्षारोपण के लिए चिन्ह्ति कर उपलब्ध कराती है, तो वे केन्द्र सरकार से राशि प्राप्त कर उसमें गहन वृक्षारोपण कराने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा कि दरभंगा एयरपोर्ट सहित सभी सरकारी संस्थानों में वृक्षारोपण किया जाना चाहिए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर कलाकारों एवं छात्रों के प्रदर्शन की सराहना की तथा कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, बच्चों, जीविका दीदी का धन्यवाद ज्ञापन किया।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रो. विद्यानाथ झा ने पर्यावरण एवं वृक्ष के संबंध से अवगत कराते हुए वृक्षों के महत्व बताये।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान के अन्तर्गत वृक्षारोपण कर हरित अच्छादन का प्रतिशत् बढ़ाकर 15 कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता है कि जल्द ही इसे 17 प्रतिशत् पर पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि वन विभाग पूरी शक्ति से इस अभियान में लगा हुआ है।
उन्होंने चंपारण में चलाये जा रहे वृक्ष पेंशन योजना को दरभंगा में भी चलाने की आवश्यकता बतायी। उन्होंने कहा कि हमारी मान्यता है कि एक वृक्ष 10 पुत्र के सामान होता है और पुरानी मान्यता के अनुसार

लोक-परलोक की रक्षा के लिए वृक्षारोपण एवं पोखर खुदवाना आवश्यक बताया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ पंचवटी की धारणा है, एक ही स्थान पर पीपल, बरगद, पाकड़, नीम और आमला का पेड़ लगाया जाए।
उन्होंने कहा कि ये वृक्ष केवल वृक्ष नहीं बल्कि अपने आप में प्रकृति की एक व्यवस्था है। कहा कि ये वृक्ष पक्षी और जानवरों को ऑक्सिजन के साथ साथ शरण, भोजन दोनों देते है। उन्होंने कहा कि यूक्लीप्टश का पेड़ जल का शोषण अधिक करता है, उसके स्थान पर पोपुलर एवं हमारे प्राचीन पौधे लगना चाहिए, ये हमारे वातावरण के अनुकूल हैं।

इसके उपरान्त सांसद, आयुक्त, दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा, जिलाधिकारी, दरभंगा, वन प्रमण्डल पदाधिकारी एवं सहायक समाहर्त्ता द्वारा शिल्पकला एवं चित्रकला प्रतियोगिता के विजय प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र अपने कर-कमलों से प्रदान किया।

कार्यक्रम के दौरान द स्पॉट लाइट थिएटर के कलाकारों ने सागर सिंह के नेतृत्व में मूक अभिनय के द्वारा पेड़ एवं जल के महत्व एवं उनके प्रति आम आदमी की संवेदनशीलता पर बेहतरीन एक्ट प्ले कर दर्शकों की खुब तालियाँ बटोरी। माउण्ट समर कॉन्वेंट के बच्चों ने वृक्षारोपण का संदेश नृत्य एवं गीत के माध्यम से दिया। इस अवसर पर वन विभाग द्वारा वृक्ष के महत्व पर बनाया गया वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया।

इस अवसर पर डीपीएम जीविका, वन विभाग के सभी पदाधिकारी जीविका दीदी कहीं पंचायतों के मुखिया गण, अन्य जनप्रतिनिधि एवं माउंट समर स्कूल व विभिन्न विद्यालय के छात्र छात्रा उपस्थित थे।

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