डब्ल्यूआईटी को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की हो कोशिश: – प्रो. धर्मेंद्र कुमर

दरभंगा । डब्ल्यूआईटी बचाओ वेबिनार का आयोजन डब्ल्यूआईटी संघर्ष मोर्चा के द्वारा आयोजित किया गया।इस कार्यक्रम में मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सह डब्ल्यूआईटी के संस्थापक कुलपति प्रो० राजमणि प्रसाद सिन्हा ने कहा कि डब्ल्यूआईटी में कोएजुकेशन की बात करना बेमानी है। इस संस्थान का निर्माण ही इंजीनियरिंग सेक्टर में महिला सशक्तिकरण का था मकसद ताकि मिथिला क्षेत्र के हर गावों से लड़कियों इंजीनियर बन सके। फिर हम कैसे इसके स्वरूप के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं। आज चिंतन इस बात का जरूरी है कि कभी 60 सीट के लिये 6000 आवेदन आता था और आज 60 सीट भी नहीं भर पाता है। इसके लिये हमें संस्थान के संसाधन को विकसित करना होगा। उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना होगा। हम इसके सलाहकार बोर्ड में हैं। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसा निर्णय लेती है तो सबसे पहले वो हमारे इस्तीफे को स्वीकार कर लें। आज कोएजुकेशन के लिये देश में ढ़ेर सारी संस्थानें है लेकिन महिला के लिये सेपरेट संस्थान की कमी है। एक संस्थान को अस्तित्व में लाने के लिये इसके पीछे एक अथक मेहनत करना पड़ा था। यहां से लेकर हम तमिलनाडु तक का दौरा किये थे। तब जाकर मिथिला के क्षेत्र में यह संस्थान अस्तित्व में आ सका था। इसीलिए कोशिश इस बात की होनी चाहिये कि बेटियों के इस संस्थान पर सिर्फ बेटियों का अधिकार हो सके।

डब्ल्यूआईटी के पूर्व निदेशक प्रो० लाल मोहन झा ने कहा कि ग्रामीण इलाके बच्चियों को पढ़ाने के लिए उनके अभिभावकों के लिए बड़ा वरदान साबित हुआ है डब्ल्यूआईटी। मैं कोएजुकेशन का भी हिमायती था लेकिन जब डब्ल्यूआईटी से जुड़ा तो वास्तविक में यह अनुभव हुआ कि महिलाओं के लिये अलग से कॉलेज की कितनी महत्ता है। कई मामलों में मैंने सीएम साइंस के कोएजुकेशन व डब्ल्यूआईटी के लड़कियों के बीच तुलनात्मक अध्ययन किया तो वास्तविक डाटा का पता चला कि डब्ल्यूआईटी में बेटियां खुद को ज्यादा अव्वल है। इसीलिए कोएजुकेशन की बात बिल्कुल नहीं होनी चाहिये। सबसे पहले इस संस्थान के लिये जरूरी है कि इंजीनियरिंग फील्ड वाले विद्वान को निदेशक बनाना होगा क्योंकि उनके पास इस फील्ड की समझ बेहतर है। उन्होंने कहा कि इसके लिये चिंतन करने की आवश्यकता है क्योंकि संस्थान सेल्फ फाइनेंस मोड का है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूआईटी को मदद की जरूरत है लेकिन ऐसा कई बार हुआ है कि मिथिला विश्वविद्यालय डब्ल्यूआईटी व दूरस्थ शिक्षा मद के पैसे से दूसरा काम कर लेता है और बाद में पैसा लौटाया भी नहीं जाता है। जरूरत इस बात का है कि संस्थान कैसे आत्मनिर्भर हो। इसके लिये गहन मंथन की जरूरत है न कि इसके कोएजुकेशन की।

मिथिला शोध संस्थान के सचिव प्रो० धर्मेंद्र कुमर ने कहा कि एक तरफ सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को आगे बढ़ा रही है तो दूसरी ओर देश के छठे व बिहार के पहले महिला प्रौद्योगिकी संस्थान में कोएजुकेशन की बात हो रही है। यह कहीं से उचित नहीं है। इसके मूल स्वरूप के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिये। संस्थान में कैसे शत-प्रतिशत बेटियों का नामांकन हो इसके लिये गुणवत्तापूर्ण फैकल्टी का चयन होना चाहिये। लैब को विकसित करना होगा। कैंपस को अपडेट करना होगा। डब्ल्यूआईटी को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की कोशिश होनी चाहिये।

डीएमसीएच के पैथोलॉजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष व सेवानिवृत्त डॉ० अजीत चौधरी ने कहा कि किसी भी जिले में मेडिकल कॉलेज व इंजीनियरिंग कॉलेज का होना अपने-आप में गर्व की बात होती है। यहां दरभंगा में देश का छठा व बिहार का पहला महिला प्रौद्योगिकी संस्थान होना अपने आप में एक अनूठी पहचान है। इसके स्वायत्तता की रक्षा करना हमलोगों का प्रथम कर्तव्य है। चिंतन तो इस बात का होना चाहिये कि संस्थान के खुलने के डेढ़ दशक बाद कैसे यहां एमटेक व पीएचडी की पढ़ाई हो ताकि हम अपने ही छात्राओं को यहां एक दिन टीचिंग का मौका दें। आज देखा जा रहा है कि बेटियां हर मामलों में बेटों से आगे है। डब्ल्यूआईटी के स्थापना से दरभंगा सहित बिहार के सुदूर गाँव की बेटियों की इंजीनियर के रूप में नई उड़ान देखने को मिली। अपने शहर में महिला प्रौद्योगिकी संस्थान होने से इस क्षेत्र में बेटियों को इंजीनियर बनने का ग्राफ दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। इसीलिए कोएजुकेशन की बात न कर इसके स्वायत्तता को बचाना होगा और डब्ल्यूआईटी के फिजिकल सिस्टम को दुरुस्त करना होगा।

कार्यक्रम के मॉडरेटर आइसा के संदीप कुमार चौधरी ने कहा कि डब्ल्यूआईटी में कोएजुकेशन की बात कतई बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने कहा की बिहार के उच्च शिक्षा पर यूपी का कब्जा है। जो बिहार के उच्च शिक्षा की बर्बादी का मुख्य कारण है।उन्होंने कहा की पूर्व कुलपति ने डिस्टेंस को बर्बाद किया वर्तमान डब्ल्यूआईटी को बर्बाद करने में लगे हुए है इसको मिथिला के छात्र, युवा, न्याय पसंद समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।

जाप के प्रदेश प्रवक्ता दीपक झा ने कहा कि डब्ल्यूआईटी में महिला के स्वायत्तता को बचाना हम सबों का कर्तव्य है। कोएजुकेशन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं है। अगर सीटें रिक्त रहती है। संस्थान घाटा में चलता है तो इसके लिये सबों को मिलजुलकर इसके बीच का रास्ता निकालना होगा कि कैसे बेटियों की स्वायत्तता व संस्थान का अस्तित्व दोनों कायम रह सके।

एआईएसएफ के जिला सचिव शरत कुमार सिंह अगर इसके साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई तो अब हमलोग चुप नहीं बैठेंगे। आज देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ० ए० पी० जे० अब्दुल कलाम व पूर्व वैज्ञानिक निदेशक डॉ० मानस बिहारी वर्मा के सपनों के डब्ल्यूआईटी में महिला हितों की रक्षा करना हम सब का कर्तव्य ही नहीं बल्कि सबसे बड़ा धर्म है।

एक निजी चैनल के संपादक सह अधिवक्ता डॉ० चंदन ठाकुर ने कहा कि डब्ल्यूआईटी में कोएजुकेशन की बात करना कतई बर्दाश्त नहीं है। आज सीटें रिक्त रहती है तो विश्वविद्यालय प्रशासन कोएजुकेशन की बात कर रहा है और अगर कल कोएजुकेशन होने के बावजूद अगर सीटें रिक्त रहती है तो क्या संस्थान को बंद कर दिया जायेगा। इसीलिए अगर सीटें रिक्त रह जाती है तो इसके लिये गहन-मंथन व चिंतन की जरूरत है। स्थानीय जुबली हॉल में एक मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया जाय जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन, सभी जनप्रतिनिधियों, छात्र-संघ के सभी दलों के प्रतिनिधियों, समाज के सभी वर्ग के बुद्धजीवियों के साथ ही साथ प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व वेब मीडिया के साथियों के साथ एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाय ताकि डब्ल्यूआईटी में महिला की स्वायत्तता व इस संस्थान का अस्तित्व दोनों बरकरार रह सके।

इस कार्यक्रम में आइसा के राष्ट्रीय महासचिव प्रसन्नजीत कुमार, भाकपा माले जिला सचिव बैद्यनाथ यादव, प्रो० शारदा नंद चौधरी, प्रो०अखिलेश कुमार जायसवाल, आइसा जिलाध्यक्ष प्रिंस राज, जिला सचिव विशाल मांझी, मयंक कुमार यादव, संदीप कुमार, राजू कर्ण, जाप के विश्वविद्यालय अध्यक्ष कुणाल पांडे, विभूति कुमार झा, जाप जिलाध्यक्ष दीपक स्टार, एनएसयूआई के राष्ट्रीय संयोजक मो० शदाब, त्रिभुवन कुमार, गजेंद्र नारायण शर्मा, राजू कुमार मिश्रा, सन्नी कुमार, केशव चौधरी, डब्ल्यूआईटी की छात्रा पारुल कुमारी, आरती कुमारी, स्वाति कुमारी, साधना कुमारी व ओनम सिंह आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम में टेक्निकल संचालन सिद्धार्थ राज ने किया।

 

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