सोमवार को मिथिला विश्वविद्यालय समेत बिहार के कई विश्वविद्यालयों के करीब 2600 अतिथि सहायक प्राध्यापक सामूहिक अवकाश पर रहे। कल शाम से आज सुबह तक पटना में धरना को लेकर अतिथि सहायक प्राध्यापक पहुंचना शुरू कर दिया। दिन के 12 बजे गांधी मैदान से शिक्षकों का जत्था रैली की शक्ल में विधानसभा घेराव के लिये निकला लेकिन पहले से सैकड़ों की संख्या में पहुंचे पुलिस ने विस्कोमान भवन के सामने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेटिंग लगाकर रोक दिया। जिसके बाद सभी शिक्षक सड़क पर ही गांधीवादी तरीके से बैठ गये।
जहां दरभंगा के केवटी से भाजपा विधायक डॉ० मुरारी मोहन झा भी पहुंचे और सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वर्षों से विभिन्न महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापक के साथ बिहार सरकार घोर अन्याय कर रहा है। रातों रात हिंदी विषय में कार्यरत शिक्षकों को सड़क पर ला दिया है। कहाँ गया 20 लाख रोजगार का वादा। आज सरकार नौकरी से निकाल रही है। इनका फरियाद तक सुनने के लिये सरकार का कोई भी दूत नहीं आया। हम विधानसभा में सरकार से मांग करेंगे कि अतिथि शिक्षकों का समायोजन किया जाय और महामहिम राज्यपाल से भी मुलाकात करेंगे।
वहीं पालीगंज से माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि सरकार अगर अतिथि सहायक प्राध्यापकों का जल्द समायोजन नहीं करती है और हिंदी के शिक्षकों का टर्मिनेशन वापस नहीं लेती है तो सदन से लेकर सड़क तक प्रदर्शन होगा। हम जब सरकार में नहीं थे तब भी शिक्षकों के समायोजन की बात करते थे और आज तो सरकार को बाहर से समर्थन भी कर रहे हैं। हम बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के प्रति संवेदनशील हैं और उनके समायोजन के लिये संवैधानिक तरीके से किसी भी हद तक जा सकते हैं।
शिक्षक प्रकोष्ठ के विधान परिषद डॉ० मदन मोहन झा भी पहुंचे और उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे पर सरकार से बात करेंगे और आपलोगों की समस्या से अवगत कराएंगे।
माले विधायक महबूब आलम ने कहा कि जब बिहार के महाविद्यालयों में शिक्षकों का घोर अभाव था तब आप अतिथि सहायक प्राध्यापक से काम लिये और उसे आज उठाकर बाहर फेंक रहे हैं। सरकार का ये यूज एंड थ्रो का नीति नहीं चलेगा। सरकार शिक्षकों से अनुबंध पर हस्ताक्षर करा उसे ब्लैकमेल कर रही है जबकि उनका काम सिर्फ क्लास लेना था जबकि उससे स्थायी शिक्षकों के समान हर ड्यूटी के साथ 5 घण्टे रहना अनिवार्य कर दिया। फिर अब आप उसके समायोजन से क्यों पीछे हट रहे हैं जब समान काम तो समान जॉब होना चाहिये। अगर अतिथि सहायक प्राध्यापकों का समायोजन नहीं होता है तो हम ईंट से ईंट बजा देंगे।
बाद में पटना सिटी के मजिस्ट्रेट ने सड़क जाम का हवाला देकर रोड खाली करने की चेतावनी दी और फिर भीड़ को सड़क से हटाने के लिये लाठीचार्ज तक करवा दिया जिसमें महिला शिक्षकों को भी नहीं बख्शा। इस दौरान दर्जनों शिक्षकों को गिरफ्तार कर गांधी मैदान थाना लाया गया और भीड़ को तितर-बितर कर दिया।
जिसके बाद अतिथि सहायक प्राध्यापक का एक शिष्टमंडल शिक्षामंत्री प्रो० चंद्रशेखर से मिलने राजद के प्रदेश कार्यालय पहुंचे। खबर लिखे जाने तक शिक्षामंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी थी।
अतिथि शिक्षक संघ ने कहा कि सरकार अगर सकारात्मक कदम नहीं उठाती है तो अगले कार्यदिवस से बिहार के सभी महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में ताला जड़ दिया जायेगा और शिक्षक वही अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ जाएंगे।