मारपीट कर जबरदस्ती दस्तखत करा रही ED – सीएम भूपेश:छापे में क्या मिला क्यों नहीं बताती ED, मतलब कार्रवाई राजनीति से प्रेरित

छापे में क्या मिला क्यों नहीं बताती ED, मतलब कार्रवाई राजनीति से प्रेरित|
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के यहां ED की रेड को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बड़ा बयान सामने आया है। सीएम ने कहा कि अब तक सबसे ज्यादा ईडी की रेड केवल छत्तीसगढ़ में पड़ी है।कांग्रेस महाअधिवेशन के बाद से अब तक 50 से ज्यादा छापे पड़े हैं। कितना पैसा और संपत्ति जप्त की है,यह ED नहीं बता रही है।भ्रष्टाचार के खिलाफ हम हैं और उसकी जांच होनी चाहिए लेकिन ED को जो अधिकार मिला है उसका दुरुपयोग हो रहा हैं। सीएम ने कहा कि छापे के दौरान ED मारपीट कर जबरदस्ती दस्तखत करा रही है। कई लोगों ने इसकी शिकायत की है और इसे लेकर सीएम भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखा है।

हमने बेरोजगारों को अप्रैल फूल नहीं बनाया, उन्हें भत्ता दिया है – सीएम

बेरोजगारी भत्ते को लेकर बीजेपी नेताओं के बयान और इस मुद्दे पर चल रही सियासत को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि बीजेपी शासन के समय साल 2003-04 में बेरोजगारी भत्ता 300 रू देने का फैसला किया था।2012-13 में 1 हजार किया गया और 2016-17 में इसे बंद कर दिया गया। उन्होने कहा कि पूरे 15 साल में बीजेपी सरकार ने 100 करोड़ रुपए का भुगतान किया।हमने इस साल के बजट में 250 सौ करोड़ का प्रावधान किया हैं।बीजेपी के समय मे गरीबी रेखा के नीचे लोगों को ही बेरोजगारी भत्ता मिलता था लेकिन हमने ऐसी कोई शर्त नही रखी।उनके शासन काल मे भी पंजीयन 2 वर्ष का होना अनिवार्य था और हमारे समय मे भी।बीजेपी के समय बेरोजगारी भत्ते की प्रक्रिया कठिन थी।हमारे समय में बेरोजगारी भत्ते की प्रक्रिया आसान है।ऑनलाइन पोर्टल है, घर बैठे आवेदन की सुविधा है।अभी तक एक ही दिन में 6 हजार आवेदन आ चुके है।हमने बेरोजगारों को अप्रैल फूल नहीं बनाया, उन्हें भत्ता दिया है। सीएम ने कहा कि उन्होंने कल 4 बेरोजगारों को 2500 रुपए का चेक दिया है।

आरक्षण संसोधन विधेयक पर राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं होने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उन्होनेराज्यपाल को आरक्षण को लेकर पत्र लिखा है किनियुक्ति और एडमिशन में परेशानी हो रही है। राज्यपाल को इस बारे में जल्दी फैसला लेना चाहिए। वहीं भ्रष्टाचार को लेकर बीजेपी के जारी किये वीडियो को लेकर करा कि चिटफंड घोटाला उनकी ही सरकार में हुआ। धरमलाल कौशिक खुद रोजगार मेला लगाए थे और चिटफंड कंपनियों के एजेंटों को नियुक्ति पत्र दिया था। इसका सीधा मतलब है की चिटफंड में वे स्वयं लिप्त है

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