शिक्षा विभाग अपनी परम्परा पर कायम खामियों से भरा हुआ है अधिसूचना:- धनन्जय झा
दरभंगा ।लम्बे समय से नियमित शिक्षकों के भांति सेवाशर्त एवं वेतनमान की लड़ाई लड़ रहे स्थानीय निकायों के शिक्षकों के मूल वेतन मे 15% की वृद्धि का पत्र निर्गत होते ही शिक्षकों की प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है। बिहार सरकार के मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह वृद्धि देने की घोषणा किये थे लेकिन सालभर बीत जाने के बाबजूद अभितक शिक्षकों को इसका लाभ नही मिल सका है। हालांकि शिक्षा विभाग की ओर से समय समय पर पत्र निकाल कर जरूर शिक्षकों को उम्मीद दिलाया जाता रहा है कि लाभ मिलेगा लेकिन कब यह बताने वाला कोई नही है। पूरे प्रकरण पर टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट ने अपनी प्रतक्रिया व्यक्त करते हुए इसे छलावा करार दिया है। संघ के जिलाध्यक्ष प्रमोद मण्डल, महासचिव रंजन पासवान, प्रवक्ता धनन्जय झा ने बताया कि शिक्षको की लड़ाई नियमित शिक्षकों की भांति सेवाशर्त औऱ वेतनमान की जबतक लक्ष्य प्राप्त नही हो जाता है यह लड़ाई जारी रहेगी। वही आगे उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के द्वारा पूर्व के भांति ही इसमें में कई सारी खामियां बरती गई है। वही संघ के जिला सचिव राजीव पासवान, कार्यकारिणी सदस्य सोनू मिश्रा, उपाध्यक्ष राशिद अनवर, रणधीर राय ने बताया कि एक तो पहले से ही राज्यकर्मियो को मिल रहे समान इंडेक्स और लेवल में सरकार सत्रह प्रतिशत कम वेतन दे रही है अगर उसी अंतर को ही वह पाट दे तो शिक्षकों का मूल वेतन कम से कम सत्रह प्रतिशत तक बढ़ जाएगा वही दूसरी ओर केलकुलेटर का बहाना बनाकर फिर से इसे लटकाने का कार्य कर रही है। एक आसान लेवल निर्धारण करने में तो उसे सवा साल लग गए और यह केलकुलेटर कब तक जारी होगा यह भी कहना मुश्किल है। मौटे तौर पर सरकार शिक्षकों को और समाज को गुमराह कर रही है।