दरभंगा।कहावत है – चोर चोर मौसेरे भाई। पंचायत स्तर पर मुखिया और पंचायत सचिव मिल जाएं और इनके मन में लोभ हो तो किसी कल्याणकारी पंचायत योजना की कितनी दुर्गति होगी उसका अनुमान लगाया जा सकता है। और साथ में कनिय अभियंता का सहयोग मिल जाए तो योजना की राशि में अनियमितता के हनीमून को कौन टाल सकता?
कुछ कुछ ऐसा ही हुआ दरभंगा जिले के मोतीपुर ग्राम पंचायत में। यह पंचायत अलीनगर प्रखंड में पड़ता है।
मुखिया वही हैं श्रीमान अरुण पासवान, जिनकी एक कहानी हम कह चुके हैं। यह दूसरी किस्त है। इसमें उनके गैर कानूनी गतिविधि का पराक्रम दिखेगा.. थोड़े विस्तार से।
मोतीपुर पंचायत के इस कथानक में प्रथम अपीलीय प्राधिकारी आयुक्त के समक्ष अपीलकर्ता हैं मनोज कुमार यादव, पिता वैद्यनाथ यादव, ग्राम अंदौली। जबकि जिला लोक शिकायत में परिवादी हैं विमल कुमार झा।
मनोज के आरोप के आलोक में कनीय अभियंता ने जो प्रतिवेदन सुनवाई के लिए पेश किया उसके मुताबिक 2015- 16 में राम जानकी मंदिर से सोहरवा टोल तक मिटटी एवं खरांजा कार्य मनरेगा के तहत हुआ। लेकिन काम के नाम पर सिर्फ मिट्टी भरा गया।
एक अन्य योजना के तहत 2017-18 में सुरेश झा के घर से बिंदा यादव के घर तक सिर्फ मिट्टी भरा गया। खारांजा नहीं हुआ। 14 वें वित्त आयोग के तहत राम जानकी मंदिर से मिश्र पोखर तक पीसीसी ढलाई और नाला निर्माण होना था। 4 लाख 65 हजार अग्रिम निकासी हुई लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। पंचायत सचिव को पहले तो 3 दिन में काम पूरा करवाने को कहा गया। बाद में 1 महीने का समय दिया गया।
काम पूरा नहीं हुआ। चूकि कनीय अभियंता सचिन कुमार के एक प्रतिवेदन को लोक शिकायत के एक अन्य मामले में गलत ठहराया गया था इसलिए सहायक अभियंता की उपस्थिति में स्थल जांच की गई। अनेक खामी पाई गई। नाला निर्माण के संबंध में कहा गया कि वह तो 12 वे वित्त योजना के तहत बना हुआ है। इसलिए 14 वे में नाला के लिए भुगतान नहीं होगा।
कनीय अभियंता और सहायक अभियंता के अनुसार मापी पुस्त संभव नहीं। इसलिए डीडीसी को भेजे प्रतिवेदन में अलीनगर बीडीओ ने लिखा कि निकासी की गई राशि का समायोजन नहीं हुआ। अतः मुखिया और पंचायत सचिव समस्त राशि जमा करवाएं।जारी है…