संस्कृत सप्ताह के तृतीय दिन विशिष्ट व्याख्यान ऑनलाइन जूम ऐप के माध्यम से हुआ आयोजित

दरभंगा। कामेश्वरसिंह-दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में मनाए जा रहे संस्कृत सप्ताह के तृतीय दिवस पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर के वरिष्ठ विद्वान् प्रोफ़ेसर हंसधर झा का विशिष्ट व्याख्यान “ज्योतिष शास्त्र में अशुभ जन्म मीमांसा” इस विषय पर हुआ। यह विशिष्ट व्याख्यान ऑनलाइन जूम ऐप के माध्यम से आयोजित किया गया, जिसका लाइव प्रसारण यूट्यूब पर भी किया जा रहा था। उनका यह व्याख्यान लगभग 1:15 घंटे से भी अधिक समय तक चला। व्याख्यान के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशिनाथ झा, नवनियुक्त प्रतिकुलपति प्रो. सिद्धार्थ शंकर सिंह, व्याकरण-साहित्य के संकायाध्यक्ष और अध्यक्ष, छात्र कल्याण प्रो. सुरेश्वर झा, वेद विभागाध्यक्ष प्रो. विद्येश्वर झा तथा कई स्नातकोत्तर विभागों के विभागाध्यक्ष, अंगीभूत महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य सहित शिक्षक, छात्र और छात्रायें तथा अन्य संस्कानुरागी भी सम्मिलित थे।
प्रो. हंसधर झा के द्वारा “ज्योतिष शास्त्र में अशुभ जन्म मीमांसा” प्रस्तुत विशिष्ट व्याख्यान में सामान्य जनों के ज्ञान हेतु कई महत्त्वपूर्ण तथ्य उभरकर सामने आए। जैसे एक सामान्य जन केवल जन्म कुंडली में निर्दिष्ट शुभ तथा अशुभ दोषों को जानता है उसके अतिरिक्त अशुभ जन्म दोषों से वे अपरिचित ही रहते हैं। उन्होंने अपने व्याख्यान में इन्हीं अपरिचित दोषों और उनकी शान्ति के उपायों की विस्तृत चर्चा की। जैसे यदि जातक का जन्म पिता के जन्म नक्षत्र में अथवा माता के जन्म नक्षत्र में अथवा सोदर भाई या बहन के जन्म नक्षत्र में होता है तो वह अशुभ जन्म कहलाता है। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी या अमावास्या को यदि किसी जातक का जन्म होता है तो वह भी अशुभ कहलाता है। ग्रहण काल के समय यदि जन्म होता है वह भी जातक के लिए अशुभ होता है। जन्म के लिए सामान्यतः निर्धारित अवधि से पूर्व यदि जन्म होता है तो भी उसे शास्त्रों में अशुभकारक कहा गया है। इसी प्रकार किसी अंग के विकार या वृद्धि के साथ जातक का हुआ जन्म भी अशुभ माना गया है। केवल मनुष्यों के जन्म में ही शुभाशुभ का विचार नहीं होता है अपितु पशुओं के जन्म भी शुभाशुभ का विचार हमारे शास्त्रों में किया गया है। जैसे सिंह राशि में सूर्य के रहने पर अर्थात् भाद्र मास में गाय को बच्चा होने पर भी अशुभ माना गया है। इसी प्रकार मकर राशि में सूर्य के रहने पर अर्थात् माघ मास में भैंस को बच्चा होने पर अशुभ होने की बात शास्त्रों में वर्णित है।
अपने विशिष्ट व्याख्यान के क्रम में आगे उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने हमारे शास्त्रों में न केवल इन सभी दोषों की चर्चा ही की है अपि तु इन दोषों की शांति के लिए अनेक उपाय भी दिखाये हैं। इस क्रम में उन्होंने पराशर, नारद, शाकल्य, वसिष्ठ, गर्गाचार्य इत्यादि मुनियों के द्वारा शान्ति के लिए सुझाये गये उपायों की चर्चा की। साथ ही यह भी कहा कि कई ऐसे भी दोष होते हैं जिनकी शान्ति की अपेक्षा नहीं भी होती है। जैसे जन्मकुण्डली में कई शुभ ग्रहों का एक साथ योग होने पर ये सभी दोष हानिप्रद नहीं भी होते हैं।
व्याख्यान के उपरांत में विद्वानों ने इस विषय पर चर्चा भी की । प्रोफेसर विद्येश्वर झा ने प्रश्न किया कि यदि कोई जातक अशुभ जन्म के कारण मूक पैदा होता है या अंधा पैदा होता है या विकलांग पैदा होता है तो क्या ज्योतिष शास्त्र उक्त शान्ति विधि के द्वारा उसको सही किया जा सकता है?
इस प्रश्न का समाधान अध्यक्ष, छात्र कल्याण ने यह कहते हुए दिया कि जरूर किया जा सकता है क्योंकि यदि उस अशुभ रोग का पता चलता है तो उसकी शांति के उपाय से रुग्ण व्यक्ति में नूतन चिकित्सा पद्धति से यंत्र आरोपण सुलभतया हो जाती है अन्यथा नवीन चिकित्सा पद्धति में भी करोड़ रुपए खर्च करने पर भी यंत्र आदि का आरोपण सफल नहीं हो पाता है।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री ने भी एक प्रश्न उठाया कि यदि नवीन चिकित्सा पद्धति से छेदनपूर्वक (by scissoring) जातक का जन्म यदि शुभ दिन में करबा दिया जाता है तो वह अशुभ जन्म से बच सकता है क्या? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए प्रोफ़ेसर हंसधर झा जी ने कहा कि शास्त्रों में जो विचार प्रस्तुत किया गया है वह सहज जन्म को आधार मानकर न कि कृत्रिमतया कराये गये जन्म के आधार पर।
आजशांति मंत्र के साथ यह सभा समाप्त हुई। के कार्यक्रम के संयोजक तथा संचालक स्नातकोत्तर व्याकरण विभाग के सहायक प्राचार्य डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री थे। जिन्होंने अत्यंत विद्वत्तापूर्ण इस ऑनलाइन संगोष्ठी का संचालन किया। कार्यक्रम का आरंभ नन्हीं बच्ची नैवेद्या शास्त्री के संस्कृत मंगलाचरण से शुरू हुआ तथा स्वागत भाषण धर्मशास्त्रविभाग के आचार्य पुरेंद्र बारिक ने किया। कुलपति की अन्यत्र व्यस्तता के कारण अध्यक्षीय भाषण विश्वविद्यालय के अध्यक्ष, छात्र कल्याण प्रो. सुरेश्वर झा द्वारा किया गया। उपस्थित सभी सुधी जनों के धन्यवाद ज्ञापन वेद विभाग के अध्यक्ष प्रो. विद्येश्वर झा ने किया ।

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