शासन प्रशासन से हुआ मोह भंग, संघर्ष के राही .. न्याय के लिए पहुंचे अदालत

शासन प्रशासन से हुआ मोह भंग, संघर्ष के राही .. न्याय के लिए पहुंचे अदालत

शासन प्रशासन से हुआ मोह भंग, संघर्ष के राही .. न्याय के लिए पहुंचे अदालत

मुखिया पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाने वाले जनप्रतिनिधि हैं हैरान परेशान

संजय मिश्र
दरभंगा

दरभंगा जिले में सरकारी योजनाओं में हेरा फेरी के कई चौंकाने वाले मामले सतह पर आए हैं जहां प्रशासन असहाय नजर आया है। करोड़ो के वारे न्यारे वाली शिकायतों की फेहरिस्त .. जांच पर जांच .. और नतीजा सिफर। उलझनों की गिरफ्त में पड़ जाते आम जन की समझ। सिस्टम के नेक्सस का बेजार कर देने वाला ऐसा ही चर्चित कारनामा जिले के मझौलिया पंचायत का है। आम जन तो ऐसे रुख से टूट ही जाएं।

पर यहां अनियमितता के खिलाफ संघर्ष करने वाले जन प्रतिनिधि हैं। खुली आंखों से करोड़ो का खेल देखने का दर्द झेला है। ये जनप्रतिनिधि मझौलिया पंचायत के वार्ड सदस्य हैं। उनकी मानें तो मुखिया के गोरखधंधे का इस सघन खेल का आत्मविश्वास किसी आशीर्वाद की वजह से हो या ऊपरी शक्तियों के खुश होने से हो .. घाटे में तो पंचायत के लोग ही हैं।
बारह वार्ड सदस्य हैं जो प्रशासनिक रवैये से खार खाने के बाद अपने पद से सामूहिक इस्तीफा देने आला अधिकारियों के पास पहुंचते हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में हलचल मच गई। वार्ड सदस्यों के इस निर्णय के । इन्हें ऐसा न करने के लिए किसी तरह मना लिया गया। मुखिया की कारगुजारियों पर सख्ती, अंकुश और घोटाले पर न्याय का भरोसा दिया गया। पर दिया गया भरोसा फिर वही ढाक के तीन पात साबित हुआ।

वार्ड सदस्य अब दरभंगा के अदालत की शरण में हैं। 2 जनवरी 2025 को परिवाद दाखिल हुआ। सोमवार को पहली सुनवाई में शिरकत करने कई वार्ड सदस्य पहुंचे थे। अब न्याय के लिए उन्हें प्रशासनिक झुनझुना नहीं चाहिए।

परिवाद के डिटेल्स –
सीजेएम अदालत, दरभंगा
परिवाद पत्र – 08/2025

परिवादी – अरुण मंडल, वार्ड सदस्य 7 तथा उप मुखिया, मझौलिया पंचायत, हायाघाट

घटना और आरोप –
मनरेगा योजना वर्ष 2021 – 22 से अभी तक
लोक हित से वंचित पंचायत वासी साथ ही मजदूरों की हकमारी
अंदर धारा – 338, 340 (1&2), 316 (5), 318 (4) एवं 3 (5) भारतीय न्याय संहिता

पंद्रहवीं वित्त योजना एवं छठवां वित्त योजना से संबंधित काम में घोर गड़बड़ी

मुखिया के गांव होरल पट्टी में अधिक योजनाएं लागू होना जबकि अन्य गांव का उपेक्षित रह जाना

आरोपित व्यक्ति –

निवेदिता कुमारी, बीडीओ हायाघाट
अमित वर्मा, पी ओ (कार्यक्रम पदाधिकारी, मनरेगा) हायाघाट
अमित कुमार, जे इ, मनरेगा, हायाघाट
टेक्निकल असिस्टेंट, मनरेगा, हायाघाट
मुकेश कुमार, रोजगार सेवक, मनरेगा, मझौलिया पंचायत, हायाघाट
अंशु प्रिया, पंचायत सचिव, मझौलिया पंचायत, हायाघाट
ममता देवी, मुखिया, मझौलिया पंचायत, हायाघाट
डीपीओ (जिला कार्यक्रम पदाधिकारी), मनरेगा
अमित कुमार, बीपीआरओ (प्रखण्ड पंचायती राज पदाधिकारी), हायाघाट
एवं
अन्य संबंधित पदाधिकारी और कर्मी जिनकी भूमिका हो।

साक्षी –
गुड़िया देवी, वार्ड सदस्य 10
हरजीत कुमार सहनी, वार्ड सदस्य 12
सुबोध कुमार कर्ण, वार्ड सदस्य 03
रोहित कुमार चौधरी, वार्ड सदस्य 04
सरोज देवी, वार्ड सदस्य 05
इंदु देवी, वार्ड सदस्य 09
जानकी देवी, वार्ड सदस्य 08
पंकज कुमार पासवान, वार्ड सदस्य 02
लक्ष्मण पासवान, वार्ड सदस्य 01
अफरीन खातून, वार्ड सदस्य 06
विदेश्वर झा, वार्ड सदस्य 11

परिवादी अरुण मंडल को घोर आपत्ति है कि मौजूदा मुखिया की कार्य शैली में अग्रिम कार्य विधि विरुद्ध नियम के विपरीत कागजी खानापूर्ति कर उसका भुगतान आने वाली राशियों से की जा रही है। उनके आरोप के मुताबिक इस तरीके से करोड़ो रूपए की निकासी गलत तरीके से कर लिया गया है। वे याद दिलाते हैं कि अनियमितता की शिकायत ले कर प्रखंड स्तर से लेकर आयुक्त स्तर तक गए। पर कुछ नहीं किया गया। वे दृढ़ हैं कि पैसे कमाने की ऐसी हवस को रोकना निहायत जरूरी है।

वार्ड सदस्य 04 रोहित कुमार चौधरी खिन्न हैं दम साधे सिस्टम के फैलाव पर। मुखिया पति राज काज चलावे, दबंगई से पेश आए, कायदे कानून की अवहेलना करे तो क्या हस्र होगा? वही होगा जो मझौलिया जैसे पंचायतों में हो रहा। रोहित जैसों की चिंता वाजिब है। बेधड़क लूट खसोट का ऐसा सिलसिला चले तो लोगों का पंचायती राज व्यवस्था से आस्था ही डिग जायेगा। वार्ड सदस्यों को अब अदालत से आस है।

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