असहाय बिहार में बही नई बयार, जन सुराज पार्टी का उदय,  पांच संकल्प और राइट टू रिकॉल बदल देगा राज्य की तस्वीर – पीके

असहाय बिहार में बही नई बयार, जन सुराज पार्टी का उदय, पांच संकल्प और राइट टू रिकॉल बदल देगा राज्य की तस्वीर – पीके

बिहार को मिला सियासी विकल्प, नहीं चलेगी मौजूदा ब्लैकमेल वाली राजनीति – शोएब

संजय मिश्र
दरभंगा

कुछ दिन चलेंगे .. फिर लौट जाएंगे अपनी प्रोफेशनल दुनिया में .. इस या उस पार्टी के इशारे पर कर रहे पदयात्रा .. इतना जहीन लाव लश्कर, न जाने कहां से आता है फंड .. एक और फलाना नेता, उनकी तरह ही फियास्को साबित होंगे .. अरे भाई ये बिहार है बिहार .. यहां इस तरह की नौटंकी नहीं टिकने वाली .. यहां तो जात चलेगा .. पीके यानि प्रशांत किशोर तो इसका या उसका बी टीम है।

ऐसे लांक्षण, उलाहने और तंज को झेलता दो पैर जब डग भरते गांधी जयंती के दिन पटना के वेटनरी कॉलेज परिसर पहुंचा तो वहां इंतजार कर रहा अपार जनसमूह जोश से भर गया। माहौल में छिटक रही ऊर्जा मानो कोई कथा वस्तु रचे जाने का संदेश दे रही हो।

हां ! आपने जरूर सुना और देखा होगा कि जन सुराज पार्टी का गठन हो गया है। एक अभियान का राजनीतिक दल वाला स्वरूप अख्तियार करना। देश के कई सियासी दलों को चुनावी सलाह दे चुके पीके जानते हैं कि राजनीति में ऑप्टिक्स की कितनी अहमियत है। वेटनरी कॉलेज के नाम से आपके जेहन में लालू प्रसाद का दृश्य आंखों में तैरने लगा होगा। स्थापना अधिवेशन में जन सैलाब आरजेडी को यकीनन चुभ रहा होगा। छात्र राजनीति के समय इस परिसर में लालू का निवास था।

ज्यादा दिन कहां हुए पीके ने जालीदार मुस्लिम टोपी भी धारण कर ली है। आप इंडियन हैं तो राजनीति में इसके महत्व से वाकिफ होंगे। इस कनेक्ट ने आरजेडी के साथ जेडीयू को सांसत में धकेल दिया है। जन सुराज इंसाइडर्स बताते हैं की पीके की अल्पसंख्यक प्रीति का लक्ष्य 12 से 18 फीसदी मुसलमान को अपने पाले में करने का है। एम वाई का संतुलन बिगरेगा और जालीदार टोपी का नीतीश की तरफ वर्तमान खिंचाव छिन्न भिन्न हो जाएगा। लव कुश पॉलिटिकल फोर्स नहीं रह पाएंगे।

अनुमान के विपरीत बीजेपी पर जन सुराज का स्ट्रोक खतरे से खाली नहीं। अपनी जाति और मधुबनी के निवासी को जन सुराज पार्टी का अध्यक्ष बनाना बीजेपी के लिए इरिटेटिंग है। गांधी के साथ अंबेडकर का कॉक टेल कितना असर करेगा ये देखना होगा।

साल 2024, दिनांक – 2 अक्टूबर
स्थान – पटना। जन सुराज अभियान राजनीतिक दल में परिवर्तित हुई और दल के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज भारती बनाए गए। प्रशांत किशोर ने इस मैमथ रैली में कहा वे पहले की तरह ही बिहार की पदयात्रा करते रहेंगे।

गांधी जयंती पर जन सुराज आधिकारिक तौर पर राजनीतिक दल हो गया है। पटना के वेटनरी कॉलेज ग्राउंड में लाखों की संख्या में बिहार के कोने-कोने से आए लोगों की सहमति से जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने दल के पहले कार्यवाहक अध्यक्ष के साथ साथ दल के संविधान के पांच प्रमुख बिंदुओं को बिहार और देश की जनता के समक्ष रखा।

प्रशांत किशोर ने सबसे पहले जन सुराज के पांच बड़े वादों को जनता के सामने रखा। पहला बिहार को फिर से ज्ञान की भूमि बनाना। दूसरा हर युवा के हाथ में बिहार में ही रोजगार ताकि बिहार से पलायन रुक सके। तीसरा 60 वर्ष की आयु से ऊपर हर महिला- पुरुष को प्रतिमाह 2 हजार रुपए की पेंशन। इसी के साथ महिलाओं को सरकारी गारंटी पर व्यवसाय के लिए 4 प्रतिशत सालाना ब्याज पर पूंजी उपलब्ध कराना और पांचवा वादा कि बिहार के किसानों को सहयोग करके बिहार में हो रही पेट भरने वाली खेती से कमाने वाली खेती बनाना। प्रशांत किशोर ने बिहार को भरोसा दिया कि जन सुराज आएगा और यह 5 काम हो जाएगा।

प्रशांत किशोर ने दल की घोषणा करने के बाद इसके पहले कार्यकारी अध्यक्ष पूर्व भारतीय राजनयिक मनोज भारती के नाम को औपचारिक तौर पर लोगों के बीच रखा। प्रशांत ने मनोज भारती का परिचय देते हुए बताया कि इनका जन्म मधुबनी में हुआ है और ये अनुसूचित जाति से आते हैं। मनोज की शुरुआती शिक्षा जमुई के सरकारी विद्यालय से हुई और उसके बाद उन्होंने नेतरहाट से पढ़ाई की। उन्होंने IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की। फिर IIT दिल्ली में पढ़ाई करते हुए उनका चयन भारतीय विदेश सेवा में हुआ। वे चार देशों में इंडिया के राजदूत रहे।

प्रशांत किशोर ने जन सुराज दल के संविधान के प्रमुख प्रावधानों को जनता के सामने रखा और उनकी इन सभी पर सहमति ली। कहा कि जन सुराज के अध्यक्ष का कार्यकाल 1 साल का होगा और लीडरशिप काउंसिल का 2 साल। उन्होंने जोर देकर कहा कि जन सुराज देश का पहला दल होगा जो Right to Recall (राइट टू रिकॉल) लागू करेगा। जनता अपना उम्मीदवार का चयन करेगी और उनको मध्य कार्यकाल में ही हटाने का अधिकार भी जनता के पास होगा। हालांकि राइट टू रिकॉल मामले में राम कृष्ण हेगड़े के प्रयासों की अहमियत बताना उन्होंने जरूरी नहीं समझा।

उन्होंने ऐलान किया कि जन सुराज ने चुनाव आयोग को अपने आधिकारिक झंडे के लिए आवेदन किया है। झंडे में महात्मा गांधी के साथ-साथ बाबा साहेब अंबेडकर का भी चित्र होगा।

प्रशांत किशोर और मनोज भारती के साथ-साथ नालंदा विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी केसी सिन्हा, वरिष्ठ अधिवक्ता वाई बी गिरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र यादव, पूर्व सांसद मोनाजीर हसन, रामबली चंद्रवंशी ने भी जनता को संबोधित किया।

स्थापना अधिवेशन में भाग लेकर आए दरभंगा के शिक्षाविद शोएब ने बताया कि उम्मीद की किरण निकली है। बिहार का आम नागरिक जारी राजनीति से असहाय महसूस कर रहा है। कोई किसी दल के प्रति रुझान रखता हो लेकिन वो आया राम गया राम के बिहार ब्रांड से असहज है। एक व्यक्तित्व है जो नाश्ता एक घर में तो भोजन करने दूसरे घर में चला जाता है। ये सिलसिला चलता ही जा रहा। इस निकृष्ट सियासी संस्कृति से लोग उबरना चाहते। जन सुराज ने विकल्प दिया है। इसका असर होगा कि राज्य की दो प्रमुख पार्टियां भी अपने मौलिक रंगत को निखारेंगी।

विकल्प की बात अपनी जगह अहमियत रखता है। लेकिन कई सवाल हैं जो जन सुराज की प्राथमिकता में नहीं दिखता है। मसलन भ्रष्टाचार से त्रस्त आबादी। फैक्ट्री खोलेंगे तो पुराने का कायाकल्प होगा या नहीं। राज्य भर में फैले भू माफिया पर अंकुश कैसे लगेगा। शराबबंदी हटा लेने से आने वाला राजस्व इतना होगा कि पलायन रोकने लायक उद्योगों का जाल बिछ पाए। और ये कि राजनीति अवसर का खेल है तो गठबंधन में जा सकते पीके? चुनौती अपार है।

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