दरभंगा।मिथिलांचल डेवलपमेंट ऑथरिटी के संदर्भ में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का बयान साढ़े आठ करोड़ मिथिलावासियों का अपमान है। तेजस्वी के मिथिलांचल शब्द के उपयोग से सम्पूर्ण मिथिला को खंडित करने के उनके साजिश का पर्दाफाश भी होता है। नेता प्रतिपक्ष को अपने बयानों के लिए माफी मांगनी चाहिए।
दरभंगा संसद सह लोकसभा में पार्टी के सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने तेजस्वी के बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया में उपरोक्त बातें कही हैं।
सांसद डा ठाकुर ने तेजस्वी को मिथिला के इतिहास और भूगोल पढ़ने और जानकारी लेने की नसीहत देते हुए कहा की मिथिला की अवधारणा में 70 हज़ार वर्ग किलोमीटर में फैले बिहार के 24 जिले और झारखंड के 6 जिले शामिल हैं वही नेपाल के तराई क्षेत्र के लोग भी मिथिलावासी कहलाते है इस परिस्थिति में मिथिलांचल जेसे खंडित शब्द का प्रयोग कही से भी उचित नहीं है।
सांसद डा ठाकुर ने मिथिला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को तेजस्वी के ज्ञान से परे बताते हुए कहा कि उन्हे यह समझनी चाहिए की प्राचीन भारत के 16 प्रमुख सभा जनपद में मिथिला का अहम स्थान था जहां के ज्ञान सभ्यता और गरिमा देश ही नही विश्व स्तर पर चर्चित था वैसी सम्पन्न विरासत को बांटने की तेजस्वी की साजिश कभी सफल नहीं हो सकती।
सांसद डा ठाकुर ने मिथिलांचल डेवलपमेंट ऑथरिटी जेसे नेता प्रतिपक्ष के सोच को अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि उन्हे यह बताना चाहिए की मिथिला के सभी नौ उद्योग लालू राबड़ी के शासन में ही क्यों बंद हुआ और लूट हत्या अपहरण घोटाला की संस्कृति कैसे उद्योग के रूप में विकसित हो गए।
सांसद डा ठाकुर ने देश के पीएम मोदी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार को मिथिला के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध बताते हुए कहा आज दरभंगा और मिथिला क्षेत्र का जितना विकास हुआ है उसके बाद यहां के विकास के लिए तेजस्वी को चिंता करने की जरुरत नहीं है

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