मैथिली के वरीय कथाकार प्रो. मनमोहन झा का असामयिक निधन से शोक की लहर।

मैथिली के वरीय कथाकार प्रो. मनमोहन झा का असामयिक निधन से शोक की लहर।

मैथिली के वरीय कथाकार एवं पूर्व सामाजिक विज्ञान के संकायाध्यक्ष प्रो. मनमोहन झा के असामयिक निधन पर विश्वविद्यालय मैथिली विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. दमन कुमार झा की अध्यक्षता में शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें विभागीय शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र छात्राऐं उपस्थित थे।विभागाध्यक्ष अपने शोक सन्देश मे कहा कि प्रो. मनमोहन झा को साहित्य विरासत में मिली थी। क्योंकि वे मैथिली साहित्य के मूर्धन्य साहित्यकार जनार्दन झा ‘जनसीदन’ के पौत्र, हरिमोहन झा के पुत्र एवं राजमोहन झा के अनुज थे। आगे उन्होंने कहा कि ‘खिस्सा’ कथा-संग्रह के लिए इन्हें 2015 ई. में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। एक परिवार में दो भाई एवं पिता को साहित्य अकादेमी से सम्मानित होना किसी भी परिवार के लिए सौभाग्य की बात है।घर घुरैत काल, कोनो एकटा गाम तथा खिस्सा इनकी प्रसिद्ध कथा संग्रह है

।ज्ञात हो कि प्रो मनमोहन झा एलएनएमयू में ही मनोविज्ञान के शिक्षक तथा सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष थे। इस मौके पर डाॅ. सुनीता कुमारी, विभागीय कर्मी भाग्यनारायण झा, विभागीय शोधार्थी सत्यनारायण, रौशन, दीपक, हरेराम, भोगेन्द्र, बंदना, राज्यश्री, शालिनी, दीपेश, राजनाथ, पवन, मनीष, मनोज, प्रवीण, नेहा, मिथलेश, शीला, अम्बालिका, शिवम, मनोज पंडित, प्रियंका समेत सत्यम, मुकेश आदि छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति हेतु दो मिनट का मौन रखा।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *