‘कला के क्षेत्र में शोध के विविध आयाम विषय पर संगोष्ठी आयोजित।

‘कला के क्षेत्र में शोध के विविध आयाम विषय पर संगोष्ठी आयोजित।

दरभंगा: मंगलवार को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के ललित कला संकाय द्वारा विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग के परिसर में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था – ‘कला के क्षेत्र में शोध के विविध आयाम ‘।

इस संगोष्ठी में प्रो वी प्रेमलता,डाॅ गोविन्दराजू भारद्वाज, डाॅ केशवचैतन्य कुण्टे तथा डाॅ मधुरानी शुक्ला विषय विशेषज्ञ थे। यह संगोष्ठी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों रूप में सम्पन्न हुआ।

राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने मुख्य संरक्षक के रूप में दीप प्रज्ज्वलित कर किया।आपके साथ मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो ए के बच्चन, संकायाध्यक्ष प्रो बी बी एल दासआईक्यूएसी निदेशक प्रो ज्या हैदर, प्रो आर एन चौरसिया ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्ज्वलन में साथ दिया।

कुलपति  ने इस तरह के आयोजन पर बल दिया और इसे सार्थक बताया।
प्रथम तकनीकी सत्र की वाह्य विशेषज्ञा प्रो वी प्रेमलता जो स्कूल ऑफ परफार्मिंग आर्ट्स,सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ तमिलनाडु,तिरूवयूर हैं,ने ‘संगीत में अनुसंधान:तरीके,चुनौतियाँ और अवसर’ विषयक व्याख्यान में शोध-कार्य हेतु अनेक महत्वपूर्ण तत्वों की विस्तृत व्याख्या की जिससे शोध को प्रामाणिक और संश्लिष्ट बनाया जा सकता है। दूसरे वाह्य विशेषज्ञ के रूप में इग्नू,दिल्ली ने शोध की अनेक दिशाओं को चिह्नित किया जो कला क्षेत्रों संगीत, नृत्य, नाट्य आदि के सभी पहलुओं को उजागर किया। इसके बाद सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, पुणे से आमंत्रित डाॅ केशवचैतन्य कुण्टे का व्याख्यान हुआ। इन्होंने ‘ संगीत में शोध : कुछ अलक्षित क्षेत्र ‘ विषयक ओजस्वी व्याख्यान प्रस्तुत किया। शोध की महत्वपूर्ण दिशाओं और बिन्दुओं को रेखांकित करते हुए संगीत में शोध के विशाल क्षेत्र का दिग्दर्शन करवाया।

अन्तिम सत्र में राष्ट्रीय संगोष्ठी में विभागीय अतिथि शिक्षकों के अतिरिक्त स्थानीय एवं अन्य स्थानों के पंजीकृत शोध- जिज्ञासाओं ने अपना-अपना शोध-पत्र वाचन किया। देश-भर से भाग लिए हुए और शोध में रूचि रखने वाले सभी प्रतिभागियों ने इस राष्ट्रीय संगोष्ठी को बहुत लाभप्रद कहा।इस आयोजन से शोध-कार्य के लिए अनेक नये तथ्यों से परिचय हुआ जो हमारे शोध को और अधिक सम्पन्न बनाएगा। इस सत्र की अध्यक्षता प्रयागराज से डाॅ मधुरानी शुक्ला ने किया।

संगोष्ठी में आगत अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवादज्ञापन ललित कला संकायाध्यक्ष प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने किया।
अलग-अलग सत्रों का संचालन डाॅ नमिता कुमारी,डाॅ अमृता कर्मकार तथा डाॅ नितप्रिया प्रलय ने किया।अन्त में ,राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

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